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भुवनेश्वर के कैपिटल पुलिस स्टेशन में मनोज मिश्र पेश हुए
भुवनेश्वर। ओडिशा के पूर्व आईटी सचिव मनोज मिश्र स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्याकांड से संबंधित न्यायिक जांच रिपोर्ट के लापता होने के मामले में पूछताछ के लिए भुवनेश्वर के कैपिटल पुलिस स्टेशन में पेश हुए। यह मामला 2008 के कंधमाल हिंसा से जुड़ी न्यायमूर्ति एएस नायडू आयोग की रिपोर्ट के गायब होने से संबंधित है ।
पुलिस के अनुसार, मिश्र को पहले जारी समन के तहत बुलाया गया था, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि महत्वपूर्ण आधिकारिक दस्तावेज सरकारी कार्यालय से किन परिस्थितियों में गायब हुए। इस मामले में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राजेश वर्मा को भी तलब किया गया है।
उल्लेखनीय है कि ओडिशा पुलिस ने 15 जुलाई को मनोज मिश्र और राजेश वर्मा को औपचारिक नोटिस जारी कर 22 जुलाई 2026 तक उपस्थित होने का निर्देश दिया था। दोनों अधिकारी पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्यरत थे। राजेश वर्मा जहां सीएमओ में तैनात थे, वहीं मनोज मिश्र, जो भारतीय रेलवे यातायात सेवा के पूर्व अधिकारी हैं, पूर्व बीजू जनता दल सरकार के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत थे।
अधिकारियों ने बताया कि जांच का दायरा व्यापक है और उस अवधि में मुख्यमंत्री कार्यालय में आधिकारिक रिकॉर्ड के प्रबंधन, प्रसंस्करण या रखरखाव से जुड़े व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा सकती है। जांच के आगे बढ़ने के साथ अतिरिक्त पूछताछ से भी इनकार नहीं किया गया है।
पूछताछ के बाद मनोज मिश्र ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीएमओ के अधिकारियों से पूछताछ करना एक सामान्य प्रक्रिया है और चल रही जांच के कारण वे अधिक जानकारी साझा नहीं कर सकते।
यह मामला तब सामने आया जब यह पाया गया कि कंधमाल हिंसा से संबंधित महत्वपूर्ण न्यायिक जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय के रिकॉर्ड से गायब है। हालांकि अधिकांश सरकारी फाइलें सुरक्षित पाई गईं, लेकिन इस महत्वपूर्ण दस्तावेज की अनुपस्थिति ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
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