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क्राइम ब्रांच ने जांच तेज की
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प्रकाशन से वितरण तक पूरी प्रक्रिया की हो रही जांच
भुवनेश्वर। ओडिशा के सरकारी स्कूलों की कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों में सामने आईं 1,678 त्रुटियों के मामले में क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के पूर्व निदेशक मनोज पाढ़ी को गिरफ्तार कर लिया है।
इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। पाठ्यपुस्तकों में भारी संख्या में त्रुटियां सामने आने के बाद राज्यभर में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे और सरकार ने पूरे मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी थी।
यह कार्रवाई एससीईआरटी की वर्तमान निदेशक मधुस्मिता साहू द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की गई। मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच ने डीएसपी नरेंद्र कुमार बेहरा के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जो पाठ्यपुस्तकों की सामग्री तैयार करने से लेकर अनुमोदन, संपादन, प्रूफरीडिंग, मुद्रण और वितरण तक की पूरी प्रक्रिया की गहन जांच कर रहा है।
लंबी पूछताछ के बाद हुई गिरफ्तारी
सूत्रों के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने मनोज पाढ़ी से कई घंटों तक विस्तृत पूछताछ की। जांच अधिकारियों ने उनसे यह जानने का प्रयास किया कि पाठ्यपुस्तकों के मसौदों की समीक्षा किस स्तर पर हुई, अंतिम पांडुलिपि को किसने मंजूरी दी, किन विषय विशेषज्ञों और अधिकारियों ने पुस्तकों का परीक्षण किया तथा गुणवत्ता नियंत्रण के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
त्रुटियां आखिर किस चरण में हुईं, जांच के दायरे में
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां आखिर किस चरण में हुईं। यह देखा जा रहा है कि गलती सामग्री लेखन के दौरान हुई, संपादन या प्रूफरीडिंग में लापरवाही बरती गई अथवा मुद्रण और प्रकाशन के समय कोई गंभीर चूक हुई। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि स्पष्ट त्रुटियों के बावजूद पुस्तकों को बिना सुधार के लाखों विद्यार्थियों तक कैसे पहुंचा दिया गया।
दस्तावेजों और रिकॉर्ड की हो रही गहन जांच
एसआईटी पाठ्यपुस्तक निर्माण से जुड़े सभी आधिकारिक दस्तावेज, फाइलें, अनुमोदन पत्र, समीक्षा रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों व विशेषज्ञों के बयान जुटा रही है। जांच में उन सभी व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है, जो किसी भी स्तर पर पाठ्यपुस्तकों के लेखन, संपादन, समीक्षा, मुद्रण या वितरण से जुड़े थे।
क्राइम ब्रांच यह भी जांच कर रही है कि क्या यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का है या फिर इसमें प्रक्रियागत अनियमितता, आपराधिक लापरवाही अथवा किसी प्रकार की जानबूझकर की गई हेराफेरी शामिल है। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या विशेषज्ञ की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
पाठ्यपुस्तकों में हजारों त्रुटियां सामने आने के बाद विपक्षी दलों, शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने राज्य सरकार की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठाए थे। आलोचकों का कहना था कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी पुस्तकों में इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां होना अत्यंत चिंताजनक है और इससे पूरी संपादकीय एवं अनुमोदन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
क्राइम ब्रांच का कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल दोषियों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पाठ्यपुस्तक निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना भी है। जांच पूरी होने के बाद एसआईटी अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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