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पात्रता, शुल्क वापसी और कॉलेजों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश
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परीक्षा शुल्क स्वयं देना होगा; पेशेवर पाठ्यक्रम और छात्रावास शुल्क योजना से बाहर
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी निःशुल्क केजी से पीजी शिक्षा योजना को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों के बीच बनी सभी शंकाओं को दूर करते हुए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी एसओपी में योजना के तहत पात्रता, शुल्क प्रतिपूर्ति (रीइम्बर्समेंट), शुल्क वापसी, कॉलेजों की जिम्मेदारियां और विद्यार्थियों के लिए आवश्यक शर्तों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव के कारण कोई भी विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के नाम पर किसी भी कॉलेज को मनमाने ढंग से शुल्क बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी।
पहले चरण में शुल्क जमा करने वालों को मिलेगा पूरा रिफंड
सरकार ने एसओपी में स्पष्ट किया है कि जिन विद्यार्थियों ने प्रवेश प्रक्रिया के पहले चरण में पहले ही प्रवेश शुल्क जमा कर दिया है, उन्हें पूरी राशि वापस की जाएगी।
यह राशि स्टूडेंट एकेडमिक मैनेजमेंट सिस्टम (एसएएमएस) के माध्यम से उसी बैंक खाते में सीधे भेजी जाएगी, जिससे प्रवेश शुल्क का भुगतान किया गया था। इससे विद्यार्थियों को किसी अतिरिक्त आवेदन या प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
एसएएमएस पोर्टल से होंगे पुनः प्रवेश
राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में पुनः प्रवेश (री-एडमिशन) की पूरी प्रक्रिया भी एसएएमएस पोर्टल के माध्यम से ही संचालित की जाएगी।
इससे प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और डिजिटल होगी तथा विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों दोनों को सुविधा मिलेगी।
कॉलेजों को किस्तों में मिलेगा शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि निःशुल्क शिक्षा योजना के कारण कॉलेजों को आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े। इसके लिए सरकार शैक्षणिक वर्ष के दौरान चरणबद्ध तरीके से शुल्क की प्रतिपूर्ति करेगी।
एसओपी के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद पहली किस्त में 10 प्रतिशत राशि जारी होगी। दूसरी किस्त में 15 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। शेष राशि तीन समान किस्तों में 25-25 प्रतिशत के हिसाब से संस्थानों को प्रदान की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षण संस्थानों के नियमित संचालन को प्रभावित होने से बचाना है।
योजना का लाभ लेने के लिए ये होंगी पात्रता की शर्तें
उच्च शिक्षा विभाग ने योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें निर्धारित की हैं। योजना का लाभ केवल उन्हीं विद्यार्थियों को मिलेगा जो एसएएमएस पोर्टल के माध्यम से नियमित स्नातक (यूजी) या स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रम में प्रवेश लेंगे। पहली बार यूजी या पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश ले रहे हों अथवा पुनः प्रवेश (री-एडमिशन) करा रहे हों।
न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति बनाए रखें।
विशेष परिस्थितियों में उपस्थिति में कुछ छूट दी जा सकती है, लेकिन किसी भी स्थिति में यह 65 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए। निर्धारित उपस्थिति पूरी नहीं करने वाले विद्यार्थी योजना के लाभ के पात्र नहीं होंगे।
परीक्षा शुल्क विद्यार्थियों को स्वयं देना होगा
एसओपी के अनुसार शिक्षण संस्थानों द्वारा लिए जाने वाले सभी प्रवेश और पुनः प्रवेश शुल्क का भुगतान सरकार करेगी। हालांकि परीक्षा शुल्क इस योजना के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। इसलिए परीक्षा शुल्क विद्यार्थियों को स्वयं जमा करना होगा।
छात्रावास शुल्क और पेशेवर पाठ्यक्रम योजना से बाहर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रावास (हॉस्टल) शुल्क इस योजना में शामिल नहीं है। जो विद्यार्थी छात्रावास में रहेंगे, उन्हें उसका पूरा खर्च स्वयं वहन करना होगा।
इसके अलावा व्यावसायिक (प्रोफेशनल) पाठ्यक्रमों को भी निःशुल्क केजी से पीजी शिक्षा योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। यह योजना केवल निर्धारित नियमित पाठ्यक्रमों पर लागू होगी।
कॉलेज मनमाने ढंग से नहीं बढ़ा सकेंगे शुल्क
राज्य सरकार ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकारी विश्वविद्यालयों, सरकारी महाविद्यालयों तथा ज्ञानोदय योजना के अंतर्गत आने वाले सहायता प्राप्त निजी महाविद्यालयों पर शुल्क वृद्धि को लेकर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।
इन संस्थानों को पात्र नियमित पाठ्यक्रमों के लिए शुल्क बढ़ाने या संशोधित करने की अनुमति नहीं होगी।
यदि किसी विशेष परिस्थिति में शुल्क संशोधन की आवश्यकता होती है, तो संबंधित संस्थान को शुल्क विनियमन समिति (फी रेगुलेशन कमेटी) के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा। समिति की स्वीकृति मिलने के बाद ही शुल्क में किसी प्रकार का परिवर्तन किया जा सकेगा।
उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की पहल
उच्च शिक्षा विभाग ने कहा कि विस्तृत एसओपी जारी करने का उद्देश्य योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाना, विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों के बीच भ्रम दूर करना तथा पूरे राज्य में योजना को सुचारु रूप से लागू करना है।
सरकार का मानना है कि यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के द्वार और अधिक खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा राज्य में शिक्षा को अधिक सुलभ, समावेशी और किफायती बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
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