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ओडिशा सरकार ने जारी किए सख्त आदेश
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने भगवान श्रीजगन्नाथ महाप्रभु, बीजे पुरी की भूमि संपत्तियों के संरक्षण, प्रबंधन और पुनर्स्थापन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन द्वारा दायर 11,675 लंबित राजस्व मामलों के समयबद्ध निपटान करने के लिए निर्देश दिए हैं।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ अरविंद कुमार पाढ़ी ने जारी ‘अत्यंत आवश्यक’ पत्र में राजस्व परिषद के सचिव, सभी राजस्व मंडल आयुक्तों, जिला कलेक्टरों तथा भूमि अभिलेख एवं सर्वेक्षण निदेशक को मामलों की व्यक्तिगत निगरानी कर कानून, सरकारी निर्देशों और न्यायालय के आदेशों के अनुरूप शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
सरकार ने भगवान जगन्नाथ की भूमि के अभिलेखीकरण, संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासनों को मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है।
सरकार ने खोरधा, पुरी, जगतसिंहपुर, बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, गंजाम, कटक और केंद्रापड़ा जिलों की विभिन्न तहसीलों में लंबित 11,675 विविध राजस्व मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही, ओडिशा एस्टेट्स एबोलिशन अधिनियम की धारा 7(ए) के तहत एसजेटीए द्वारा दायर 257 मामलों में राजस्व परिषद के सदस्य द्वारा पारित आदेशों के तत्काल क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए गए हैं।
पत्र में तहसीलदारों को वर्ष 1927-28 के रिकॉर्ड ऑफ राइट्स की जांच कर आवश्यकता अनुसार ‘खेवट’ में संशोधन करने को कहा गया है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 18 मार्च 1974 की उस अधिसूचना को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत भगवान जगन्नाथ की बंदोबस्ती भूमि का अधिग्रहण किया गया था।
राजस्व अधिकारियों को 1888-89, 1925-26, 1927-28, 1929-30 तथा 1977-78 के पूर्व-साबिक और साबिक रिकॉर्ड ऑफ राइट्स सहित ऐतिहासिक भूमि अभिलेखों का सत्यापन कर मंदिर की संपत्तियों से जुड़े मामलों में स्वामित्व का सही निर्धारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, एसजेटीए को प्रमाणित भूमि अभिलेख और साबिक-हल सहसंबंध रिपोर्ट उपलब्ध कराने को भी कहा गया है, ताकि राजस्व परिषद के समक्ष मामलों की प्रभावी पैरवी की जा सके।
मंदिर की भूमि को अतिक्रमण, अवैध कब्जे, फर्जी दावों और निजी हितों से सुरक्षित रखने के लिए जिला कलेक्टरों को अनुभवी राजस्व निरीक्षकों, अमीनों और अन्य फील्ड कर्मियों की तैनाती करने तथा नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने मंदिर भूमि से जुड़े सभी मामलों की प्रगति की समीक्षा प्रत्येक माह जिला, उपखंड और तहसील स्तर की राजस्व बैठकों में करने तथा मासिक प्रगति रिपोर्ट राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को भेजने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य भगवान श्रीजगन्नाथ महाप्रभु की भूमि संपत्तियों का प्रभावी संरक्षण, देवता के हितों की रक्षा तथा मंदिर भूमि से जुड़े अनावश्यक मुकदमों को कम करना है।
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