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पूर्व एससीईआरटी निदेशक से लंबी पूछताछ
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जांच में प्रकाशन से वितरण तक की पूरी प्रक्रिया खंगाल रही एजेंसी
भुवनेश्वर। ओडिशा की सरकारी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में सामने आई 2,000 से अधिक भाषा और तथ्यात्मक त्रुटियों के मामले में क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच तेज कर दी है। इसी क्रम में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के पूर्व निदेशक मनोज पाढ़ी से विस्तृत पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने उनसे पुस्तकों की तैयारी, अनुमोदन, संपादन, प्रूफरीडिंग, प्रकाशन और वितरण की पूरी प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे।
यह मामला उस समय चर्चा में आया था जब कक्षा 1 से 8 तक की सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली पाठ्यपुस्तकों में 2,000 से अधिक भाषा और तथ्य संबंधी त्रुटियां सामने आई थीं। इसके बाद राज्यभर में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पूरे मामले की क्राइम ब्रांच से जांच कराने के आदेश दिए थे।
पुस्तकों के अनुमोदन और प्रकाशन प्रक्रिया पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने पूर्व एससीईआरटी निदेशक से यह जानने का प्रयास किया कि पाठ्यपुस्तकों के मसौदों की छपाई से पहले पर्याप्त स्तर पर जांच और सत्यापन किया गया था या नहीं।
जांच अधिकारियों ने यह भी पूछा कि अंतिम पांडुलिपि को प्रकाशन की मंजूरी किस स्तर पर दी गई, किन अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों ने पुस्तकों की समीक्षा की तथा क्या सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
इसके अलावा यह भी जानकारी जुटाई गई कि ड्राफ्ट प्रतियों का परीक्षण किन विशेषज्ञों ने किया और पुस्तकों को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी किसके पास थी।
गलतियां किस स्तर पर हुईं, इसकी तलाश
क्राइम ब्रांच यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां आखिर किस चरण में हुईं। जांच का दायरा सामग्री लेखन, संपादन, प्रूफरीडिंग, तकनीकी जांच, मुद्रण और प्रकाशन तक फैला हुआ है।
अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि क्या गलतियां प्रारंभिक सामग्री तैयार करने के दौरान हुईं, संपादन में लापरवाही बरती गई, प्रूफरीडिंग ठीक से नहीं हुई या फिर मुद्रण के दौरान कोई गंभीर चूक हुई।
साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां होने के बावजूद उन्हें समय रहते क्यों नहीं पकड़ा गया और बिना सुधार किए ही लाखों छात्रों तक पुस्तकें कैसे पहुंच गईं।
लापरवाही, प्रशासनिक चूक या साजिश-हर पहलू की जांच
जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है या इसके पीछे गंभीर प्रक्रियागत अनियमितता अथवा किसी प्रकार की जानबूझकर की गई हेराफेरी शामिल है।
क्राइम ब्रांच इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं किसी व्यक्ति या समूह ने पूरे प्रकाशन तंत्र में केंद्रीय भूमिका निभाते हुए अनियमितताओं को बढ़ावा तो नहीं दिया।
यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या विशेषज्ञ की जिम्मेदारी तय होती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
दस्तावेजों और रिकॉर्ड की गहन जांच
जांच के तहत क्राइम ब्रांच पाठ्यपुस्तक निर्माण से जुड़े सभी आधिकारिक दस्तावेजों, फाइलों, अनुमोदन पत्रों, समीक्षा रिपोर्टों तथा संबंधित अधिकारियों और विशेषज्ञों के बयानों की जांच कर रही है।
एजेंसी यह भी देख रही है कि पाठ्यपुस्तक तैयार करने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं तथा विभिन्न स्तरों पर गुणवत्ता नियंत्रण के लिए बनाए गए मानकों का अनुपालन हुआ या नहीं।
जांच में उन सभी व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में पाठ्यपुस्तकों के लेखन, संपादन, समीक्षा, मुद्रण या वितरण से जुड़े रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुई थी जांच
सरकारी स्कूलों की पुस्तकों में 2,000 से अधिक भाषा और तथ्यात्मक त्रुटियों का मामला सामने आने के बाद पूरे राज्य में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। विपक्ष के साथ-साथ शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने भी इस पर चिंता व्यक्त की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तत्काल क्राइम ब्रांच जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा था कि इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां सामान्य चूक नहीं मानी जा सकतीं और पूरे मामले की निष्पक्ष तथा गहन जांच आवश्यक है।
जांच रिपोर्ट से तय होगी जवाबदेही
क्राइम ब्रांच की जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि इस पूरे प्रकरण के लिए व्यक्तिगत रूप से कौन-कौन जिम्मेदार हैं तथा क्या त्रुटिपूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन केवल लापरवाही का परिणाम था या इसमें आपराधिक लापरवाही अथवा किसी बड़े षड्यंत्र के तत्व भी शामिल हैं।
जांच पूरी होने के बाद एजेंसी अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
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