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नवीन पटनायक सहित चार बीजद नेताओं को कारण बताओ नोटिस
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सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया
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नाबालिग छात्राओं को राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
भुवनेश्वर। झारसुगुड़ा जिले में हाल ही में आयोजित बीजू जनता दल (बीजद) की एक राजनीतिक रैली में नाबालिग छात्राओं की भागीदारी को गंभीरता से लेते हुए ओडिशा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (ओएससीपीसीआर) ने बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक सहित चार नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी की है।
नवीन पटनायक के अलावा पूर्व झारसुगुड़ा विधायक दीपाली दास, पूर्व ब्रजराजनगर विधायक अलका मोहंती तथा बीजू छात्र जनता दल की प्रदेश अध्यक्ष इप्सिता साहू को भी नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है।
शिकायत के बाद आयोग की कार्रवाई
आयोग ने यह कार्रवाई झसाकेतन प्रधान, आयुष सराफ और श्रियम महापात्र द्वारा दायर शिकायत के आधार पर की है। आयोग ने संबंधित नेताओं से पूछा है कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
बाल संरक्षण कानूनों के उल्लंघन की आशंका
आयोग ने अपने नोटिस में कहा है कि प्रथम दृष्टया नाबालिग बच्चों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल करना, उन्हें असुरक्षित परिस्थितियों में रखना तथा उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, गरिमा और कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव डालना बाल संरक्षण कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन प्रतीत होता है।
आयोग के अनुसार, इस प्रकार की गतिविधियां किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के तहत आपराधिक दायित्व का मामला बन सकती हैं।
सात दिन में जवाब देने का निर्देश
बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13 के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चारों नेताओं को निर्देश दिया है कि वे सात दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करें। आयोग ने पूछा है कि नाबालिग छात्राओं को राजनीतिक रैली में शामिल करने और उन्हें कथित रूप से असुरक्षित परिस्थितियों में रखने के लिए उनके खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की अनुशंसा क्यों न की जाए।
कलेक्टर, एसपी और बाल कल्याण समिति को जांच के आदेश
आयोग ने झारसुगुड़ा के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष को भी मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि जो भी व्यक्ति जिम्मेदार पाए जाएं, उनके विरुद्ध लागू कानूनों के तहत उचित कार्रवाई की जाए और सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाए।
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