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भगवान जगन्नाथ के आगमन की तैयारियां अंतिम चरण में
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झोटी-चिता कला से निखरी मंदिर की भव्यता
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प्रशासन, सेवायत और श्रद्धालु जुटे तैयारियों में
पुरी। विश्वप्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा के मद्देनजर पुरी स्थित श्रीगुंडिचा मंदिर को भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के स्वागत के लिए आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। 16 जुलाई से शुरू होने वाली रथयात्रा के दौरान तीनों विग्रह श्रीमंदिर से रथों पर विराजमान होकर श्रीगुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे, जहां वे सात दिनों तक विराजेंगे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीगुंडिचा मंदिर को भगवान श्रीजगन्नाथ का जन्मस्थल माना जाता है और रथयात्रा के दौरान यही मंदिर उनका अस्थायी निवास बनता है।
तैयारियां अंतिम चरण में
श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद कुमार पाढ़ी ने बताया कि इस वर्ष की रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। श्रीमंदिर और श्रीगुंडिचा मंदिर दोनों स्थानों पर लगभग सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर को ओडिशा की पारंपरिक ‘झोटी-चिता’ लोक कला से सजाया जा रहा है, जिससे दोनों मंदिरों की सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण और भी आकर्षक हो गया है। मंदिर परिसर के भीतर विकास और सौंदर्यीकरण से जुड़े अधिकांश कार्य भी पूरे हो चुके हैं।
प्रशासन और सरकार ने तेज की तैयारियां
मंदिर प्रशासन और ओडिशा सरकार ने लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की तैयारियां तेज कर दी हैं। उद्देश्य यह है कि रथयात्रा का प्रत्येक कार्यक्रम सुचारु और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो।
‘महाप्रभु स्वयं कराते हैं रथयात्रा का संचालन’
श्रीजगन्नाथ मंदिर के सेवायत एवं दइतापति भवानी दास महापात्र ने कहा कि मंदिर प्रशासन, राज्य सरकार और पुरी के सभी नागरिक एकजुट होकर रथयात्रा को सफल बनाने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि महाप्रभु जगन्नाथ स्वयं इस दिव्य उत्सव का संचालन और संरक्षण करते हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि श्रद्धालुओं, सेवायतों, प्रशासन और आम जनता के सामूहिक प्रयास से इस वर्ष की रथयात्रा ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनेगी।
सेवा के लिए हर वर्ष लौटते हैं दइतापति
दूसरे दइतापति सेवायत हर प्रसाद दास महापात्र, जो बेंगलुरु की एक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी में कार्यरत हैं, ने बताया कि वे हर वर्ष रथयात्रा के दौरान अपनी पैतृक सेवा निभाने के लिए पुरी लौटते हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी सेवा स्नान पूर्णिमा से शुरू होकर नीलाद्रि बीजे तक चलती है। चाहे सेवायत देश के किसी भी हिस्से या विदेश में रहते हों, उन्हें इस अवधि में पुरी लौटकर भगवान श्रीजगन्नाथ की सेवा करनी होती है।
उन्होंने बताया कि इस दौरान सभी सेवायत कठोर धार्मिक अनुशासन का पालन करते हैं। वे केवल हविष्य अन्न (सात्विक भोजन) ग्रहण करते हैं और बाहर का भोजन या पेय पदार्थ नहीं लेते।
सात दिन तक श्रीगुंडिचा मंदिर में रहेंगे महाप्रभु
रथयात्रा के दौरान भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को तीन विशाल लकड़ी के रथों पर श्रीमंदिर से श्रीगुंडिचा मंदिर लाया जाता है। तीनों विग्रह यहां सात दिनों तक विराजमान रहते हैं और इसके बाद बाहुड़ा यात्रा के माध्यम से पुनः श्रीजगन्नाथ मंदिर लौटते हैं।
हर वर्ष इस विश्वविख्यात रथयात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
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