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पुरी रथयात्रा से पहले विदेशों में रथयात्रा निकालना श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहरी ठेस : सुदर्शन पटनायक
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कहा- समाधान पर होनी चाहिए थी चर्चा
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केन्या समेत कई देशों में समय से पहले रथयात्रा को लेकर बढ़ा विवाद
भुवनेश्वर। विश्वप्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने केन्या सहित विभिन्न देशों में पुरी की वार्षिक श्रीजगन्नाथ रथयात्रा से पहले इस्कॉन द्वारा रथयात्रा आयोजित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे भगवान श्रीजगन्नाथ के करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया।
एक समाचार एजेंसी से बातचीत में सुदर्शन पटनायक ने कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि कई देशों में पुरी की पारंपरिक रथयात्रा से पहले ही रथयात्रा निकाली जा रही है। उनके अनुसार, यह परंपरा श्रीजगन्नाथ भक्तों की आस्था पर गंभीर आघात है और इससे धार्मिक परंपराओं की पवित्रता प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि अनेक देशों में पुरी की रथयात्रा से पहले ही रथयात्रा आयोजित की जा रही है। यह हमारी धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाने वाला विषय है।
श्रीमंदिर प्रशासन ने की थी बातचीत की पहल
सुदर्शन पटनायक ने बताया कि इस मुद्दे के समाधान के लिए श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने इस्कॉन के प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाया था। प्रशासन ने इस्कॉन को सभी धार्मिक और पारंपरिक तथ्यों से अवगत कराया था, लेकिन उनकी ओर से यह संदेश मिला कि इस विषय पर आगे कोई चर्चा नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि उद्देश्य विवाद बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसा समाधान निकालना था जिससे श्रीजगन्नाथ की परंपराओं और वैश्विक स्तर पर श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान बना रहे।
विदेशों में समय से पहले रथयात्रा पर लगातार उठ रहे हैं सवाल
हाल के वर्षों में अमेरिका, जर्मनी, केन्या सहित कई देशों में इस्कॉन द्वारा पुरी की निर्धारित तिथि से पहले रथयात्रा आयोजित किए जाने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अनेक श्रद्धालु, धार्मिक विद्वान और सांस्कृतिक संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि विदेशों में भी रथयात्रा का आयोजन पुरी श्रीमंदिर की परंपरागत तिथि और धार्मिक पंचांग के अनुरूप किया जाए।
उनका मानना है कि इससे भगवान श्रीजगन्नाथ की परंपराओं की एकरूपता बनी रहेगी और विश्वभर के श्रद्धालु एक ही आध्यात्मिक परंपरा से जुड़े रहेंगे।
वैश्विक स्तर पर एक समान परंपरा की मांग तेज
भगवान श्रीजगन्नाथ और ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को अपनी रेत कला के माध्यम से विश्वभर में पहचान दिलाने वाले सुदर्शन पटनायक ने कहा कि धार्मिक परंपराओं से इस प्रकार का विचलन रथयात्रा की पवित्रता और विश्वभर के श्रीजगन्नाथ भक्तों की एकता को प्रभावित करता है।
इस विवाद के बाद एक बार फिर यह मांग तेज हो गई है कि विश्वभर में जहां भी श्रीजगन्नाथ रथयात्रा आयोजित की जाए, वह पुरी श्रीमंदिर की परंपराओं और आध्यात्मिक पंचांग के अनुरूप ही आयोजित की जाए, ताकि सनातन परंपरा की मर्यादा और श्रद्धालुओं की आस्था अक्षुण्ण बनी रहे।
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