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तब होता है महाप्रज्ञ का जन्म

कटक, ओडिशा | प्रेक्षा प्रणेता, युगप्रधान आचार्य महाप्रज्ञ का 107वाँ जन्मोत्सव आज कटक में “प्रज्ञा दिवस” के रूप में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। यह आयोजन मुनि मोहजीतकुमार जी के सान्निध्य में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
इस अवसर पर मुनि मोहजीतकुमार जी ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ वैश्विक संत परंपरा के कीर्तिधर आचार्य थे। उनका जन्म उदार विचारों, नई सोच, नई दृष्टि, करुणा, सद्भावना, साधना और समाधि के युग का प्रारंभ था। उन्होंने दर्शन जगत के साथ-साथ व्यवहार जगत को भी नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं तथा जन-जन को श्रेष्ठ एवं प्रशस्त जीवन जीने का युगबोध कराया। मुनिश्री ने आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा समसामयिक प्रबोधन प्रदान करने वाले अनेक प्रेरक संस्मरणों को भी उपस्थित जनसमुदाय के समक्ष साझा किया।
मुनि जयेशकुमार जी ने अपने आदर्श आचार्य महाप्रज्ञ को विनयांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महाप्रज्ञ का जीवन समर्पण, सतत अभ्यास, सामंजस्य और सर्वधर्म सद्भाव के गुणों का अद्वितीय समन्वय था। उनका व्यक्तित्व आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ का जन्म खुले आकाश के नीचे हुआ था और उसी आकाश की विशालता ने उनके भीतर प्रज्ञा की विराटता को जन्म दिया।
मुनि भव्यकुमार जी ने “तब होता है महाप्रज्ञ का जन्म” विषयक कार्यक्रम का काव्यमय एवं प्रभावी संचालन किया, जिसने उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में सभाध्यक्ष मुकेश सेठिया ने अपने भावों की अभिव्यक्ति दी।

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