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ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर
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आईआईटी भुवनेश्वर, ओडिशा अर्बन अकादमी और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स मिलकर करेंगे शोध व नवाचार
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भुवनेश्वर-कटक क्लस्टर में निर्माण एवं ध्वस्तीकरण अपशिष्ट प्रबंधन की बनेगी व्यापक कार्ययोजना
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार के हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट ने ‘लो-कार्बन कंस्ट्रक्शन मटीरियल’ और ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ पर ‘सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस’ स्थापित करने के लिए एक अहम तीन-पक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने में मदद की।
यह पहल राज्य में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, हरित निर्माण तकनीकों को बढ़ावा देने तथा टिकाऊ शहरी विकास को नई दिशा देने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।
यह समझौता ओडिशा अर्बन अकादमी (ओयूए), आईआईटी भुवनेश्वर तथा डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के बीच संपन्न हुआ। एमओयू पर ओडिशा अर्बन अकादमी की ओर से सुवेंदु साहू, आईआईटी भुवनेश्वर की ओर से प्रोफेसर दिनकर पासला तथा डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स की ओर से षष्ठांत पात्र ने हस्ताक्षर किए।
समझौते के दौरान आवासन एवं शहरी विकास मंत्री डॉ कृष्ण चंद्र महापात्र तथा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी भी उपस्थित रहीं।
‘विकसित ओडिशा-2036’ के लक्ष्य को मिलेगा नया आधार
इस अवसर पर मंत्री डॉ कृष्ण चंद्र महापात्र ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के दूरदर्शी नेतृत्व में ओडिशा ‘विकसित ओडिशा-2036’ के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय संकल्प को भी मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित उत्कृष्टता केंद्र केवल एक शोध संस्थान नहीं होगा, बल्कि यह सतत शहरी विकास, हरित निर्माण तकनीकों और नवाचार का प्रमुख ज्ञान केंद्र बनेगा। यहां विकसित होने वाली तकनीकें और नीतियां भविष्य में पूरे राज्य के शहरी विकास की दिशा तय करेंगी।
भुवनेश्वर-कटक क्लस्टर के लिए बनेगी व्यापक अपशिष्ट प्रबंधन योजना
उत्कृष्टता केंद्र की पहली बड़ी परियोजना के रूप में भुवनेश्वर-कटक-खोरधा-जटनी-पिपिलि शहरी क्लस्टर के लिए निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (सी एंड डी) अपशिष्ट प्रबंधन की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इस योजना के तहत निर्माण एवं ध्वस्तीकरण से निकलने वाले मलबे का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा, उसके संग्रहण, पुनर्चक्रण और सुरक्षित निपटान के लिए समग्र रणनीति बनाई जाएगी। साथ ही आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने और संबंधित संस्थाओं की क्षमता विकसित करने पर भी विशेष जोर रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण एवं ध्वस्तीकरण से निकलने वाला अपशिष्ट आज शहरी प्रदूषण और पर्यावरणीय चुनौतियों का बड़ा कारण बनता जा रहा है। वैज्ञानिक प्रबंधन से इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव होगा।
तीनों संस्थानों की विशेषज्ञता का मिलेगा लाभ
समझौते के तहत तीनों संस्थानों की विशेषज्ञता का समन्वित उपयोग किया जाएगा। आईआईटी भुवनेश्वर कम-कार्बन निर्माण सामग्री, नई तकनीकों और नवाचार पर शोध एवं विकास का नेतृत्व करेगा। डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ निर्माण तकनीकों के प्रसार तथा उनके व्यवहारिक उपयोग को बढ़ावा देगा। ओडिशा अर्बन अकादमी नीति निर्माण, प्रशिक्षण और शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता विकास का कार्य संभालेगी, ताकि नई तकनीकों और नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
हरित और जलवायु-अनुकूल शहरों के निर्माण पर रहेगा फोकस
अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी ने कहा कि भविष्य के शहरों को अधिक टिकाऊ, संसाधन-कुशल और जलवायु परिवर्तन के प्रति सक्षम बनाने के लिए सतत निर्माण, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और तथ्यों पर आधारित शहरी नियोजन को अपनाना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यह उत्कृष्टता केंद्र शहरी विकास के क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देगा, जिससे ओडिशा के शहर पर्यावरणीय चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकेंगे।
भविष्य में वायु, जल और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर भी होगा काम
सरकार के अनुसार उत्कृष्टता केंद्र का दायरा केवल कम-कार्बन निर्माण सामग्री तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में यह केंद्र शहरी वायु गुणवत्ता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जल गुणवत्ता, जल संरक्षण, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा अन्य पर्यावरणीय और सतत विकास संबंधी परियोजनाओं पर भी कार्य करेगा।
इसके माध्यम से ओडिशा को जलवायु-अनुकूल शहरी विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में काम किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में यह पहल विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कम-कार्बन निर्माण तकनीकों, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और अनुसंधान आधारित नीतियों के माध्यम से न केवल पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह पहल ओडिशा के शहरी विकास मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की क्षमता रखती है।
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