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पल्लहड़ा केंद्रीय विद्यालय के स्थायी परिसर का भूमि पूजन

  •        अस्थायी परिसर का उद्घाटन

  •       केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने दिया गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा पर जोर

भुवनेश्वर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि किसी भी क्षेत्र का समग्र विकास उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की आवश्यकताओं को देखते हुए शिक्षा को रोजगारोन्मुख, कौशल आधारित और व्यावसायिक बनाया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थी भविष्य में आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बन सकें।

धर्मेंद्र प्रधान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अनुगोल जिले के पल्लहड़ा में केंद्रीय विद्यालय के स्थायी परिसर के भूमि पूजन तथा अस्थायी परिसर के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पल्लहड़ा से अपने भावनात्मक जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी पहचान इसी क्षेत्र से बनी है और यहां की सबसे बड़ी पूंजी शिक्षा है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप विद्यार्थियों को केवल पुस्तक आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्हें रोजगारपरक, कौशल आधारित और उद्यमिता से जुड़ी शिक्षा उपलब्ध करानी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों तक भी इसकी समान पहुंच सुनिश्चित हो।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पल्लहड़ा में स्थापित होने वाला केंद्रीय विद्यालय आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह विद्यालय भविष्य में अत्याधुनिक कक्षाओं, आधुनिक प्रयोगशालाओं, खेल सुविधाओं और समृद्ध पुस्तकालय से युक्त एक उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित होगा तथा विकसित ओडिशा के निर्माण में अहम योगदान देगा।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षा ही ओडिशा की पूरी क्षमता का उपयोग कर राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है। उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय विद्यालय क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं और उज्ज्वल भविष्य का द्वार खोलेगा।

पल्लहड़ा क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यहां कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ इसके निर्यात को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

उन्होंने स्थानीय ‘माल्यगिरि’ की विशिष्ट पहचान को वैश्विक ब्रांड के रूप में विकसित करने पर भी बल दिया। इस संदर्भ में उन्होंने जर्मनी में रहने वाले ओडिशा के एक प्रवासी दंपति का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने ‘माल्यगिरि अचार’ को एक सफल ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि इसी तरह स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग कर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में ढेंकानाल के सांसद रुद्र नारायण पाणि, पल्लहड़ा के विधायक अशोक मोहंती सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

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