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कॉल सेंटर पर पूछे जाते रहे सवाल पर सवाल
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10 मिनट तक होल्ड पर रही कॉल
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राजधानी भुवनेश्वर किस जिले में, कॉल सेंटर के कर्मचारी ने पूछे सवाल
भुवनेश्वर। ओडिशा में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार के बेहतर व्यवस्था के दावों के बीच 108 एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना एक बार फिर सामने आई है। राजधानी भुवनेश्वर में एक मीडिया संस्थान के कर्मचारी की अचानक तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस सेवा से तत्काल सहायता मांगने के बावजूद कॉल सेंटर पर लगातार सवाल-जवाब होते रहे, कॉल करीब 10 मिनट तक होल्ड पर रही और एंबुलेंस चालक से भी संपर्क नहीं हो सका।
इस दौरान मरीज की हालत बिगड़ती देख सहयोगियों ने समय गंवाए बिना निजी वाहन से उसे अस्पताल पहुंचाया।
भुवनेश्वर किस जिले में है?
कॉल के दौरान कॉल सेंटर के कर्मचारी को यह तक जानकारी नहीं थी कि राज्य की राजधानी भुवनेश्वर किस जिले में स्थित है, जिससे आपातकालीन सेवा की तैयारी और दक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
यह प्रश्न सुनकर कॉल करने वाला व्यक्ति हैरान रह गया। उनका कहना है कि कॉल सेंटर का कर्मचारी ओड़िया भाषा में बातचीत कर रहा था, लेकिन उसे यह जानकारी नहीं थी कि राज्य की राजधानी भुवनेश्वर किस जिले में आती है।
कॉल करने वालों ने मरीज की स्थिति, पूरा पता, लैंडमार्क और अन्य आवश्यक जानकारियां विस्तार से बताईं। इसके बावजूद प्रक्रिया में अपेक्षित तेजी दिखाई नहीं दी। आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में कुछ मिनटों की देरी भी मरीज के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। ऐसे में लंबा इंतजार परिजनों और सहयोगियों की चिंता बढ़ाने वाला साबित हुआ।
आखिरकार निजी वाहन बना सहारा
जब काफी देर तक एंबुलेंस के पहुंचने की कोई सूचना नहीं मिली, तब सहयोगियों ने समय गंवाना उचित नहीं समझा। उन्होंने तत्काल एक निजी वाहन की व्यवस्था की और बीमार कर्मचारी को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज शुरू किया गया।
सहयोगियों का कहना है कि यदि वे केवल एंबुलेंस का इंतजार करते रहते, तो मरीज की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी।
आपातकालीन सेवा की तैयारी पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना के बाद 108 एंबुलेंस सेवा के संचालन, कॉल सेंटर कर्मचारियों के प्रशिक्षण, स्थानीय भौगोलिक जानकारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। राजधानी जैसे महत्वपूर्ण शहर के बारे में बुनियादी जानकारी का अभाव और आपातकालीन कॉल को लंबे समय तक होल्ड पर रखना व्यवस्था की कार्यकुशलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच दिखा अंतर
राज्य सरकार समय-समय पर स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण, डिजिटल तकनीक के उपयोग और 108 एंबुलेंस नेटवर्क को मजबूत बनाने के दावे करती रही है। इन सेवाओं का उद्देश्य दुर्घटना, हृदयाघात, स्ट्रोक या अन्य आपात स्थितियों में मरीज तक कम से कम समय में चिकित्सा सहायता पहुंचाना है।
हालांकि, भुवनेश्वर की यह घटना इस बात की ओर संकेत करती है कि यदि कॉल सेंटर स्तर पर ही समन्वय और त्वरित कार्रवाई में कमी रह जाए, तो पूरी आपातकालीन सेवा की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।
जांच और जवाबदेही की जरूरत
इस मामले ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं-क्या कॉल सेंटर कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण दिया गया है? क्या उनकी स्थानीय जानकारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का नियमित मूल्यांकन होता है? क्या कॉल होल्ड रहने के दौरान किसी वैकल्पिक त्वरित व्यवस्था का प्रावधान है?
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