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ओडिशा बनेगा पूर्वी भारत का प्रमुख मरीन हब : मुख्यमंत्री

  •     पारादीप, धामरा, गोपालपुर, चांदीपुर और अस्तरंग में विकसित होंगे आधुनिक फिश लैंडिंग सेंटर, थोक बाजार व एक्वा पार्क

  •     मत्स्य क्षेत्र के डिजिटलीकरण के लिए लागू होगा ‘रीयलक्राफ्ट’ पोर्टल

  •     अगले 10 वर्षों में शामिल होंगे 150 अत्याधुनिक डीप-सी फिशिंग वेसल

  •     500 नौकाओं का होगा आधुनिकीकरण

भुवनेश्वर। ओडिशा को समुद्री मत्स्य क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने और ब्लू इकोनॉमी को नई गति देने की दिशा में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं की हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रमुख तटीय क्षेत्रों पारादीप, धामरा, गोपालपुर, चांदीपुर और अस्तरंग में अत्याधुनिक फिश लैंडिंग सेंटर, थोक मछली बाजार और एक्वा पार्क विकसित किए जाएंगे। साथ ही पूरे मत्स्य क्षेत्र का डिजिटलीकरण कर ‘रीयलक्राफ्ट’ पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन पहलों से ओडिशा पूर्वी भारत का प्रमुख मरीन हब बनकर उभरेगा और राज्य की ब्लू इकोनॉमी को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।

मुख्यमंत्री भुवनेश्वर स्थित ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (ओयूएटी) के सभागार में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गहरे समुद्र में सतत मत्स्य दोहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग ऑफ फिशरीज इन द हाई सीज’ के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन (एलओए) प्रणाली का राष्ट्रीय शुभारंभ किया।

छह लाख मछुआरों के लिए ऐतिहासिक पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा की धरती से एलओए प्रणाली का राष्ट्रीय शुभारंभ पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। इससे राज्य के लगभग छह लाख समुद्री मछुआरों के जीवन और आजीविका में सकारात्मक बदलाव आएगा।

उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में गुजरात के वेरावल से भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मछली पकड़ने के लिए ‘एक्सेस पास’ व्यवस्था शुरू की गई थी। इसके तहत अब तक देशभर के 5,000 मछुआरों को अनुमति मिल चुकी है, जिनमें 866 मछुआरे ओडिशा के हैं। अब अगले चरण में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मत्स्य आखेट के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन जारी किए जा रहे हैं।

ओडिशा के आठ मछुआरों को एलओए प्रदान किए गए

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रारंभिक चरण में ओडिशा के आठ मछुआरों को एलओए प्रदान किए गए हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री कृषि उद्योग योजना के तहत दो अत्याधुनिक डीप-सी फिशिंग वेसल को भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र में संचालन की अनुमति भी दी गई है।

150 डीप-सी फिशिंग वेसल और 500 नौकाओं का होगा आधुनिकीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा विजन-2036 और विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने ओडिशा डीप-सी फिशिंग मिशन शुरू किया है। इसके तहत अगले 10 वर्षों में 150 अत्याधुनिक डीप-सी फिशिंग वेसल शामिल किए जाएंगे, जबकि 500 मौजूदा मछली पकड़ने वाली नौकाओं का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इससे समुद्र में सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

मत्स्य क्षेत्र को मिलेगा आधुनिक आधारभूत ढांचा

मुख्यमंत्री ने कहा कि तटीय क्षेत्रों में विकसित होने वाले आधुनिक फिश लैंडिंग सेंटर मछुआरों को मछली उतारने, भंडारण और विपणन की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। आधुनिक थोक मछली बाजारों से व्यापार अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होगा, जबकि एक्वा पार्कों के विकास से मत्स्य पालन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और मछुआरों की आय में वृद्धि होगी।

‘रीयलक्राफ्ट’ पोर्टल से होगा मत्स्य क्षेत्र का डिजिटलीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे मत्स्य क्षेत्र को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए ‘रीयलक्राफ्ट’ पोर्टल लागू किया जाएगा। इसके माध्यम से मछुआरों का पंजीकरण, नौकाओं का संचालन, उत्पादन, विपणन और सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं सुगम तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा।

ओडिशा जैसे तटीय राज्यों को बड़ा लाभ मिलेगा – राज्यपाल

राज्यपाल डॉ हरिबाबू कंभमपाटी ने कहा कि भारत की लंबी समुद्री तटरेखा और विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र  देश के लगभग 5 करोड़ (50 मिलियन) मछुआरों की आजीविका का आधार है। लेटर ऑफ ऑथराइजेशन प्रणाली से मत्स्यजीवी 11 परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विशेष रूप से ओडिशा जैसे तटीय राज्यों को बड़ा लाभ मिलेगा।

मत्स्य उत्पादन और निर्यात में अग्रणी बनने की क्षमता : धर्मेंद्र प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ओडिशा में मत्स्य उत्पादन, प्रसंस्करण और समुद्री खाद्य निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक अवसंरचना, सरकारी योजनाओं और नई तकनीकों के प्रभावी उपयोग से राज्य शीघ्र ही देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक और समुद्री खाद्य निर्यातक राज्यों में शामिल हो सकता है।

एलओए प्रणाली समुद्री मत्स्य क्षेत्र में बड़ा सुधार : राजीव रंजन सिंह

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी एवं पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार समुद्री मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास के लिए लगातार नीतिगत सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि गहरे समुद्र में उपलब्ध विशाल मत्स्य संसाधनों के वैज्ञानिक, जिम्मेदार और सतत उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए लेटर ऑफ ऑथराइजेशन (एलओए) प्रणाली एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल है। इससे समुद्री मत्स्य संसाधनों का संरक्षण भी होगा और मछुआरों को नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मत्स्य एवं पशुपालन राज्य मंत्री प्रो एसपी सिंह बघेल, ओडिशा के मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मल्लिक, मुख्य सचिव अनु गर्ग, भारत सरकार के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ अभिलाख लिखी सहित विभिन्न तटीय राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, मत्स्य सहकारी समितियों, एफएफपीओ, समुद्री उद्यमियों तथा बड़ी संख्या में मछुआरों ने भाग लिया।

नई लेटर ऑफ ऑथराइजेशन व्यवस्था के साथ भारत ने गहरे समुद्र में वैज्ञानिक, पारदर्शी और सतत मत्स्य दोहन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। इससे न केवल समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लाखों मछुआरों की आय बढ़ाने और देश की ब्लू इकोनॉमी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

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