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ई-20 पेट्रोल को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, भ्रामक दावों से बचें : संजय लाठ

  •     ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव बोले

  •     ओडिशा समेत किसी भी राज्य से इंजन खराब होने की शिकायत नहीं

  •    यूट्यूब पर वायरल वीडियो के पीछे साजिश की आशंका जताई

भुवनेश्वर। ई-20 पेट्रोल (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर सोशल मीडिया और यूट्यूब पर वायरल हो रहे दावों के बीच ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल संजय लाठ ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और तथ्यों पर भरोसा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ई-20 पेट्रोल को लेकर लोगों में अनावश्यक डर पैदा किया जा रहा है, जबकि इसके समर्थन में कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आए हैं।

हाल ही में बिहार के एक यूट्यूबर्स द्वारा किए गए दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए लाठ ने कहा कि यह दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि देशभर के पेट्रोल पंपों से पिछले लगभग दो वर्षों से प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल भरा जा रहा है। इस दौरान इथेनॉल की मात्रा सरकार की नीति के तहत चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई गई है और अब यह 20 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की प्रक्रिया कोई नई नहीं है, बल्कि यह कई वर्षों से जारी है।

एक-दो मामलों से पूरे ई-20 पर सवाल नहीं उठाए जा सकते

संजय लाठ ने कहा कि यदि वास्तव में ई-20 पेट्रोल इंजन के लिए नुकसानदायक होता, तो हर पेट्रोल पंप से प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों में ईंधन भरने के बाद बड़ी संख्या में वाहन खराब होने की शिकायतें सामने आतीं। उन्होंने कहा कि यदि किसी पेट्रोल पंप से रोजाना 500 वाहन ईंधन भरवा रहे हैं और उनमें केवल एक वाहन में समस्या आती है, तो इसका कारण सीधे तौर पर ई-20 पेट्रोल को नहीं माना जा सकता।

उनका कहना था कि यदि ई-20 पेट्रोल इंजन को नुकसान पहुंचाता, तो 500 वाहनों में कम से कम 50 से 100 वाहन प्रभावित होते, जबकि ऐसा कहीं भी देखने को नहीं मिला है।

पेट्रोल और इथेनॉल आसानी से अलग नहीं होते

सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों पर भी उन्होंने सवाल उठाया, जिनमें कहा गया कि पेट्रोल और इथेनॉल अलग-अलग हो गए। लाठ ने कहा कि वैज्ञानिक रूप से यह दावा भी सही नहीं है।

उन्होंने बताया कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से एथेनॉल को अलग करना सामान्य परिस्थितियों में संभव नहीं है। इसके लिए लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक पानी मिलाना पड़ता है। जब तक इतनी मात्रा में पानी नहीं मिलाया जाएगा, तब तक इथेनॉल पेट्रोल से अलग नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि यदि किसी वाहन की टंकी में पेट्रोल और इथेनॉल अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि उसमें पानी मिलाया गया है। ऐसे में संबंधित वाहन मालिक को यह जांच करनी चाहिए कि पानी कहां और किसने मिलाया, क्योंकि वाहन की ईंधन टंकी तक पहुंच सामान्यतः वाहन चालक या मालिक के नियंत्रण में ही होती है।

पानी आया कहां से, इसकी जांच होनी चाहिए

संजय लाठ ने कहा कि यदि किसी वाहन की टंकी में वास्तव में पानी मिला है, तो यह जांच का विषय है कि वह पानी वहां कैसे पहुंचा। उन्होंने कहा कि वाहन की ईंधन टंकी तक पहुंच सामान्यतः वाहन मालिक या चालक के नियंत्रण में होती है। इसलिए इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना जांच के पूरे ई-20 कार्यक्रम को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।

ओडिशा समेत किसी भी राज्य से शिकायत नहीं

संजय लाठ ने दावा किया कि ओडिशा में अब तक ई-20 पेट्रोल से इंजन खराब होने की अन्य कोई भी शिकायत सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि देश के किसी भी राज्य से इस प्रकार की व्यापक शिकायतें प्राप्त नहीं हुई हैं।

उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में ई-20 से कोई गंभीर तकनीकी समस्या होती, तो पेट्रोलियम कंपनियों, वाहन निर्माताओं और पेट्रोल पंप संचालकों के पास बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंचतीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

भ्रामक प्रचार से बचने की अपील

सेक्रेटरी जनरल ने लोगों से सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और अपुष्ट दावों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीकी विषय पर विशेषज्ञों और अधिकृत संस्थाओं की जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि ई-20 पेट्रोल को लेकर फैलाए जा रहे कुछ भ्रामक दावे किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा भी हो सकते हैं। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सही तथ्य सामने आ सकें और लोगों में अनावश्यक भ्रम की स्थिति समाप्त हो।

ई-20 से ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

संजय लाठ ने कहा कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है। इससे कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता घटेगी, जिससे भारत वैश्विक तेल बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव से काफी हद तक सुरक्षित रह सकेगा। साथ ही, एथेनॉल के अधिक उपयोग से किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

आयात पर होने वाला विदेशी मुद्रा व्यय कम होगा

ई-20 के व्यापक उपयोग से कच्चे तेल के आयात पर होने वाला विदेशी मुद्रा व्यय कम होगा, जिससे रुपये को मजबूती मिलेगी। विदेशी मुद्रा की बचत का सकारात्मक प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और आम लोगों की क्रय शक्ति में भी वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में ई-20 एक अहम भूमिका निभाएगा।

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