-
सुरेश पुजारी ने डिजिटल प्रणाली से प्रक्रिया को सुगम बनाने का दिया निर्देश
-
ओडिशा में जल्द लागू होगी पूरी तरह लागू होगी नई प्रणाली
भुवनेश्वर। कैशलेस और पेपरलेस भूमि पंजीकरण व्यवस्था पर लोक सेवा भवन में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
ओडिशा सरकार ने भूमि पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, भ्रष्टाचारमुक्त और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के सभी पंजीकरण कार्यालयों में पूरी तरह कैशलेस और पेपरलेस भूमि पंजीकरण प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है।
बैठक में प्रस्तावित सुधारों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य भूमि पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नागरिकों और अधिकारियों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क को न्यूनतम करते हुए डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाया जाए।
नई व्यवस्था के तहत भूमि खरीद-बिक्री के लिए खरीदार और विक्रेता को आवेदन जमा करने हेतु पंजीकरण कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी। दोनों पक्षों के बीच सौदा तय होने के बाद संपूर्ण आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जाएगी। केवल दस्तावेज के निष्पादन (रजिस्ट्री) के समय पहचान सत्यापन और अन्य वैधानिक औपचारिकताओं के लिए संबंधित पक्षों को पंजीकरण अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि वर्तमान में पंजीकरण शुल्क के रूप में 15,000 तक नकद भुगतान की जो व्यवस्था है, उसे समाप्त कर दिया जाएगा। भविष्य में भूमि पंजीकरण से संबंधित सभी प्रकार के भुगतान केवल ऑनलाइन डिजिटल माध्यमों से ही स्वीकार किए जाएंगे। इससे वित्तीय लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर अंकुश लगेगा।
सरकार ने भूमि पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बनाने का भी निर्णय लिया है। इसके तहत आवेदकों को खरीदार और विक्रेता की पहचान संबंधी दस्तावेज, भूमि का विवरण, एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (ईसी) तथा अन्य आवश्यक अभिलेख ऑनलाइन अपलोड करने होंगे।
सरकार का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से कागजी कार्यवाही में कमी आएगी, सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी तथा पंजीकरण प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी भी समाप्त होगी।
बैठक में पारदर्शिता और निष्पक्षता को और मजबूत बनाने के लिए एक नई व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। इसके तहत भूमि पंजीकरण से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन और परीक्षण केवल संबंधित पंजीकरण कार्यालय तक सीमित न रहकर राज्य के किसी भी पंजीकरण कार्यालय द्वारा डिजिटल माध्यम से किया जा सकेगा। इससे प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष, तेज और प्रभावी बनेगी।
सरकार ने निर्णय लिया है कि भूमि पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज तैयार करने और उन्हें ऑनलाइन प्रस्तुत करने का अधिकार केवल विभाग में पंजीकृत डीड राइटरों और अधिवक्ताओं को ही होगा। ऑनलाइन आवेदन के दौरान उनके पंजीकरण संबंधी विवरण देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा स्टाम्प विक्रेताओं, अधिवक्ताओं और डीड राइटरों को भी विभाग के साथ विधिवत पंजीकृत होना आवश्यक होगा।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नई भूमि पंजीकरण प्रणाली के प्रभावी और सुचारु क्रियान्वयन के लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जल्द से जल्द तैयार कर अधिसूचित की जाए, ताकि पूरे राज्य में एक समान और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जा सके।
बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ अरविंद पाढ़ी, पंजीकरण महानिरीक्षक पी अन्वेषा रेड्डी, राजस्व विभाग, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) तथा ओडिशा कंप्यूटर एप्लीकेशन सेंटर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
