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दो वर्षों में ओडिशा में 558 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र की वृद्धि
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राज्य ने देश में तीसरा स्थान हासिल किया
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77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव में मुख्यमंत्री का हरित क्रांति का आह्वान
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कहा- विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक
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सात प्रमुख नदियों के किनारे विकसित होंगे हरित पट्टी
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अगले वर्ष 9 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
भुवनेश्वर। पिछले दो वर्षों में ओडिशा में 558 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र की वृद्धि हुई है, जिसके साथ राज्य ने देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। ‘आम जंगल योजना’ के तहत 19,975 हेक्टेयर क्षतिग्रस्त वन क्षेत्र का पुनर्जीवन किया गया है तथा 43.18 लाख लोगों को आजीविका आधारित कार्यक्रमों से जोड़ा गया है। इन कार्यक्रमों पर अब तक 1,488 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कपिलेश्वर में आयोजित 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव समारोह का नेतृत्व करते हुए यह जानकारी दी तथा ओडिशा को हरित विकास का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी से निपटने का सबसे प्रभावी एवं दीर्घकालिक उपाय व्यापक स्तर पर पौधरोपण ही है।
उन्होंने बताया कि ‘वर्धित हरित पट्टी योजना’ के अंतर्गत चालू वर्ष में 358 हेक्टेयर भूमि पर 15.93 लाख पौधे लगाए जाएंगे। वहीं, शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से लगभग 6.95 लाख पौधे लगाने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आम जंगल योजना’ के तहत 19,975 हेक्टेयर क्षतिग्रस्त वन क्षेत्र का पुनर्जीवन किया गया है। इसके साथ ही 43.18 लाख स्थानीय हितग्राहियों को 1,488.52 करोड़ रुपये की आजीविका आधारित योजनाओं से जोड़ा गया है।
सात प्रमुख नदियों के किनारे बनेगी हरित पट्टी
मुख्यमंत्री ने ‘साबुज महानदी मिशन’ के तहत महानदी, तेल, ईब, ब्राह्मणी, रुषिकुल्या, बैतरणी और वंशधारा नदियों के किनारे हरित पट्टी विकसित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में 774 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.65 लाख पौधे लगाए गए, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए 2,702 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 9 लाख पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण पर नियंत्रण और शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए राज्य के शहरों में भी लगभग 7 लाख नए पौधे लगाए जाएंगे।
मैंग्रोव संरक्षण और ताड़ के पौधों पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने काम्पा, ओएफएसडीपी-द्वितीय, मिश्ती तथा ईसीआरआईसीसी परियोजनाओं के तहत चल रहे कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि मैंग्रोव वनों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के साथ-साथ आकाशीय बिजली से सुरक्षा के लिए ताड़ के पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण किया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान को जनआंदोलन बनाने के लिए राज्य के नागरिकों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष ओडिशा में एक ही दिन में 1.49 करोड़ पौधे लगाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया था।
वन संरक्षण समितियों को किया सम्मानित
वन संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मुख्यमंत्री ने अनुगोल जिले की जेरेंगा बूढ़ीपहाड़ वन संरक्षण समिति तथा मयूरभंज जिले की गुड़गुड़िया पर्यावरण विकास समिति को दो-दो लाख रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक पौधरोपण करने और पौधों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही ओडिशा को हरित, समृद्ध और पर्यावरण के अनुकूल राज्य बनाया जा सकता है।
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