भुवनेश्वर: श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने कहा है कि वार्षिक रथ यात्रा से पहले गुंडिचा मंदिर में चल रहे सभी मरम्मत, संरक्षण और सौंदर्यीकरण कार्य समय पर पूरे कर लिए जाएंगे, ताकि रथ यात्रा के दौरान सभी धार्मिक अनुष्ठान सुचारु रूप से संपन्न हों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढी ने बताया कि गुंडिचा मंदिर परिसर में युद्धस्तर पर जीर्णोद्धार कार्य जारी है। मंदिर के उत्तरी प्रवेश द्वार की मरम्मत पूरी कर ली गई है, जबकि प्रांगण में क्षतिग्रस्त खोंडालाइट पत्थरों को बदल दिया गया है। इसके अलावा, अड़ापा मंडप और नकाचना द्वार के बीच कई स्थानों पर पत्थरों का नवीनीकरण किया गया है, जिससे रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पारंपरिक पहंडी यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
उन्होंने बताया कि मंदिर के गर्भगृह, जगमोहन और नाटमंडप के संरक्षण एवं मरम्मत कार्य को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के साथ विस्तृत चर्चा की गई है। इन हिस्सों का संरक्षण कार्य इस माह की 18 तारीख से शुरू किया जाएगा। यह कार्य उस अवधि में किया जाएगा, जब महाप्रभु श्रीजगन्नाथ और उनके सहोदर देवता रथ यात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहेंगे।
अरविंद पाढी ने कहा कि संरक्षण कार्य की रूपरेखा एसजेटीए की तकनीकी सलाहकार समिति के परामर्श से तैयार की गई है और इस संबंध में एएसआई के महानिदेशक को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। तकनीकी समिति संरक्षण कार्य की लगातार निगरानी करेगी, ताकि सीमित समय में वैज्ञानिक तरीके से कार्य पूरा किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सभी संरक्षण कार्य सेवायतों के साथ समन्वय स्थापित कर किए जाएंगे, जिससे मंदिर की धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों पर कोई प्रभाव न पड़े तथा इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रहे।
इस बीच, श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए श्रीजगन्नाथ मंदिर के नाटमंडप में रैंप निर्माण का भी निर्णय लिया गया है। रैंप के डिजाइन और निर्माण की जिम्मेदारी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भुवनेश्वर को सौंपी गई है।
एसजेटीए प्रमुख ने कहा कि गुंडिचा मंदिर, जिसे महाप्रभु श्रीजगन्नाथ का जन्मबेदी माना जाता है, वहां रथ यात्रा से पहले आधारभूत सुविधाओं के उन्नयन और सौंदर्यीकरण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और मंदिर की ऐतिहासिक एवं स्थापत्य विरासत का संरक्षण सुनिश्चित करना है।
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