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ग्रामीण श्रमिकों को मिलेगी 352 रुपये दैनिक पारिश्रमिक
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मनरेगा की जगह शुरू हुई नई रोजगार गारंटी योजना
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125 दिन के रोजगार और 5,575 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान
भुवनेश्वर। केंद्र सरकार की नई विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) योजना बुधवार, 1 जुलाई से पूरे देश में लागू हो गई है। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह अब यह नई ग्रामीण रोजगार योजना प्रभावी होगी। ओडिशा सरकार ने योजना के तहत राज्य में 352 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी अधिसूचित की है, जो केंद्र द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय न्यूनतम दैनिक पारिश्रमिक से अधिक है।
केंद्र सरकार के अनुसार, नई योजना के तहत देशभर में औसत अधिसूचित दैनिक मजदूरी 298.80 रुपये से बढ़कर 327.40 रुपये हो गई है, यानी औसतन 28.60 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि हुई है।
कई राज्यों ने मजदूरी 15 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि की
उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में मजदूरी दर में 15 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। वहीं केरल, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक जैसे राज्यों में दैनिक मजदूरी 360 रुपये से 409 रुपये के बीच निर्धारित की गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, देश के 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में न्यूनतम मजदूरी लागू कर दी गई है।
ओडिशा में चालू वित्त वर्ष के बजट में 5,575 करोड़ का प्रावधान
नई योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में 5,575 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ग्रामीण विकास विभाग पिछले कई सप्ताह से प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर योजना के सफल क्रियान्वयन की तैयारियों में जुटा हुआ है।
प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिन सुनिश्चित होगी मजदूरी
योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के सुनिश्चित मजदूरी आधारित रोजगार का अधिकार मिलेगा। इसका उद्देश्य कृषि संकट, मौसमी बेरोजगारी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आय के संकट के दौरान परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बताया कि बुवाई और कटाई जैसे महत्वपूर्ण कृषि कार्यों के दौरान सरकार विशेष रूप से 60 दिनों की अवधि अधिसूचित करेगी, ताकि खेती और रोजगार के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
स्थायी सामुदायिक कार्यों को प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचा, आजीविका संबंधी परिसंपत्तियों का निर्माण, अत्यधिक मौसमीय घटनाओं से निपटने तथा आपदा तैयारी से जुड़े स्थायी सामुदायिक कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक ग्राम पंचायत में जनभागीदारी और आधुनिक तकनीक के माध्यम से ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार की जाएगी, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप टिकाऊ ग्रामीण विकास सुनिश्चित हो सके।
पंजीकृत श्रमिक नई योजना में होंगे स्थानांतरित
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा के अंतर्गत चल रहे सभी कार्य, निर्मित परिसंपत्तियां, अभिलेख तथा पंजीकृत श्रमिकों को नई योजना में स्थानांतरित किया जा रहा है, ताकि रोजगार की निरंतरता बनी रहे। इसके लिए सभी जिला कलेक्टरों, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के परियोजना निदेशकों, प्रखंड विकास अधिकारियों (बीडीओ), पंचायत कार्यपालक अधिकारियों तथा ग्राम रोजगार सेवकों को नई कार्यप्रणाली और दिशा-निर्देशों से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।
डिजिटल प्रणाली से होगी निगरानी
पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए योजना को डिजिटल प्रणाली से भी जोड़ा जा रहा है। इसके तहत परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग, श्रमिकों की उपस्थिति, निधि की निगरानी और सामाजिक अंकेक्षण की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, पंचायत प्रतिनिधियों और क्षेत्रीय अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं, ताकि संशोधित दिशा-निर्देशों, वित्तीय प्रावधानों और कार्य योजना की जानकारी दी जा सके।
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