Home / Odisha / कवि का तीखा व्यंग्य – वीरांगनाओं का देश अब बना रीलांगनाओं का

कवि का तीखा व्यंग्य – वीरांगनाओं का देश अब बना रीलांगनाओं का

  •     अश्लील डिजिटल सामग्री, सामाजिक बदलाव, ‘बेटी बचाओ’ के संदेश और लव जिहाद जैसे मुद्दों पर बेबाक कविता ने बटोरी खूब तालियां

  •     हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार और राष्ट्रभावना से सजी यादगार साहित्यिक संध्या

  •     भुवनेश्वर में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने बांधा समां, देर रात तक गूंजती रहीं तालियां

भुवनेश्वर। राजधानी भुवनेश्वर का भंज कला मंडप मंगलवार की रात कविता, हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार, संवेदना और राष्ट्रभावना के रंगों से सराबोर रहा। यहां आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध बनाए रखा। समसामयिक विषयों पर तीखे व्यंग्य, प्रेम और संवेदनाओं से ओतप्रोत रचनाएं, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से जुड़ी कविताएं तथा मंचीय प्रस्तुति की प्रभावशीलता ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में हास्य-व्यंग्य के लोकप्रिय कवि सुदीप भोला ने अपनी ओजस्वी और धारदार प्रस्तुति से समसामयिक सामाजिक मुद्दों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आधुनिक डिजिटल संस्कृति, सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लील सामग्री, बदलते सामाजिक मूल्यों और युवाओं की जीवनशैली पर व्यंग्य करते हुए कहा कि “वीरांगनाओं का देश अब रीलांगनाओं का देश बन गया है।” उनकी इस पंक्ति पर पूरा सभागार तालियों और “वाह-वाह” की गूंज से भर उठा।

अपनी कविता के माध्यम से उन्होंने समाज में बढ़ते अश्लील कंटेंट, सांस्कृतिक मूल्यों के क्षरण और पारिवारिक संस्कारों पर पड़ रहे प्रभाव को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने “बेटी बचाओ” का आह्वान करते हुए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और संस्कारों की रक्षा का संदेश दिया। अपनी प्रस्तुति में उन्होंने लव जिहाद जैसे चर्चित सामाजिक विषय का भी उल्लेख करते हुए समाज को सजग रहने और युवा पीढ़ी को सही दिशा देने की आवश्यकता पर बल दिया। हास्य और व्यंग्य के साथ सामाजिक चेतना का संदेश देने वाली उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने जोरदार तालियों के साथ सराहा और देर तक उनकी पंक्तियों की चर्चा होती रही।

व्यंग्यात्मक रचनाओं में व्यवस्था की विसंगतियों पर तीखा प्रहार

हास्य-व्यंग्य के लोकप्रिय कवि सुदीप भोला ने अपनी धारदार शैली से लोकतंत्र, वोटर लिस्ट, एसआईआर, राजनीति और समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति जैसे समसामयिक विषयों को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी व्यंग्यात्मक रचनाओं में व्यवस्था की विसंगतियों पर तीखा प्रहार भी था और समाज को जागरूक करने का संदेश भी। व्यंग्य के बीच उन्होंने अपनी चर्चित कविताओं का पाठ कर पूरे वातावरण को भावुक बना दिया। महाकुंभ और ऑपरेशन सिंदूर जैसे विषयों पर आधारित उनकी राष्ट्रभावना से ओतप्रोत कविताओं को भी श्रोताओं ने भरपूर सराहना दी।

श्वेता सिंह ने श्रृंगार रस कार्यक्रम में अलग ही रंग भरा

कवयित्री श्वेता सिंह ने श्रृंगार रस की मधुर, भावपूर्ण और संवेदनशील रचनाओं से कार्यक्रम में अलग ही रंग भर दिया। प्रेम, मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की गहराई को उन्होंने सहज अभिव्यक्ति के साथ प्रस्तुत किया। उनकी कविताओं ने विशेष रूप से युवा श्रोताओं को आकर्षित किया और हर प्रस्तुति के बाद सभागार तालियों से गूंज उठता रहा।

शायर नदीम शाद की शायरी ने बांधा समां

मशहूर शायर नदीम शाद ने अपनी दिलकश शायरी और बेहतरीन अंदाज़-ए-बयां से महफिल में अलग ही रंग भर दिया। उन्होंने इश्क, जिंदगी, रिश्तों, इंसानी जज़्बात और सामाजिक सरोकारों पर आधारित अपनी ग़ज़लों और शेरों को इतनी खूबसूरती से पेश किया कि श्रोता पूरी तरह उनकी शायरी में डूब गए। उनकी हर पंक्ति पर सभागार से “वाह-वाह”, “मुकर्रर अर्ज़ है” और जोरदार तालियों की गूंज सुनाई देती रही। उनकी शायरी ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि जीवन और समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए भी प्रेरित किया। उनके मंच से उतरने तक पूरा सभागार लगातार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

 अनिल चौबे ने मस्ती को अपनी कविताओं में जीवंत कर दिया

वहीं हास्य-व्यंग्य के चर्चित कवि अनिल चौबे ने अपने बनारसी अंदाज से मंच संभालते ही माहौल को ठहाकों से भर दिया। उन्होंने बनारस की संस्कृति, लोकजीवन और वहां की मस्ती को अपनी कविताओं में जीवंत कर दिया। इसके बाद समसामयिक राजनीति और व्यवस्था पर उनके सटीक एवं स्वस्थ व्यंग्य ने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। उनकी प्रस्तुति के दौरान कई बार लगातार बजती तालियों के कारण उन्हें अपनी कविता कुछ क्षणों के लिए रोकना पड़ा।

पूरे कवि सम्मेलन के दौरान हास्य, व्यंग्य, वीर रस, श्रृंगार और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रोताओं ने सभी कवियों की प्रस्तुतियों का पूरे उत्साह के साथ स्वागत किया और देर रात तक सभागार में डटे रहे। साहित्य प्रेमियों का उत्साह इस बात का प्रमाण था कि भुवनेश्वर में इस स्तर के साहित्यिक आयोजनों के प्रति लोगों की गहरी रुचि है।

विनीत चौहान ने श्रोताओं में भरा राष्ट्रगौरव का जज्बा

देशभक्ति के ओजस्वी कवि विनीत चौहान ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से पूरे सभागार में राष्ट्रप्रेम का अद्भुत वातावरण बना दिया। उनकी जोशीली कविताओं ने श्रोताओं के रोंगटे खड़े कर दिए और बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा। उन्होंने सिख इतिहास के अमर अध्याय गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों के अतुलनीय बलिदान को भावपूर्ण शब्दों में याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी ओजपूर्ण प्रस्तुति ने वीरता, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को जीवंत कर दिया, जिससे अनेक श्रोता भावुक हो उठे।

देशभक्ति के साथ-साथ विनीत चौहान ने अपनी कविताओं में वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक विसंगतियों पर भी सटीक व्यंग्य किए। उन्होंने व्यवस्था की कमियों, सामाजिक चुनौतियों और बदलते मूल्यों पर तीखे कटाक्ष करते हुए समाज को आत्ममंथन का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति में ओज, संवेदना और व्यंग्य का ऐसा संतुलन देखने को मिला जिसने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा। हर कविता के बाद सभागार तालियों और “वाह-वाह” की गूंज से देर तक गूंजता रहा।

इस मौके पर वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर शर्मा, उद्योगपति एवं समाजसेवी प्रबोध मोहंती, भुवनेश्वर मारवाड़ी सोसाइटी के अध्यक्ष संजय लाठ, आकाश के डायरेक्टर अजय बहादुर सिंह, अनिल कुमार राय, शंकर यादव चंद्रशेखर सिंह, संपत्ति मोड़ा, वीरेंद्र बेताला, साकेत अग्रवाल, रमाशंकर रुंगटा, किशन खंडेलवाल, नंदलाल सिंह सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।

Share this news

About desk

Check Also

IAT NEWS INDO ASIAN TIMES ओडिशा की खबर, भुवनेश्वर की खबर, कटक की खबर, आज की ताजा खबर, भारत की ताजा खबर, ब्रेकिंग न्यूज, इंडिया की ताजा खबर

जाजपुर में देह व्यापार गिरोह का भंडाफोड़

    दो महिलाओं समेत पांच हिरासत में     मुख्य डाकघर के पास मकान …