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पूरी नगरी भक्तिमय वातावरण में सराबोर
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108 पवित्र कलशों के जल से होगा महाप्रभु, बलभद्र और देवी सुभद्रा का दिव्य स्नान
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स्नान मंडप पूरी तरह सजा
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लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को लेकर सुरक्षा और यातायात की व्यापक व्यवस्था
पुरी। विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ संस्कृति के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठानों में से एक पवित्र स्नान यात्रा 29 जून भक्ति, आस्था और परंपरा के बीच संपन्न होगी। भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के जल से दिव्य स्नान कराया जाएगा। इस पावन अवसर को लेकर पूरी नगरी पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबी हुई है और देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु इस अलौकिक दर्शन के साक्षी बनने के लिए पुरी पहुंच चुके हैं।
स्नान यात्रा को लेकर श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंदिर परिसर में स्थित स्नान मंडप को आकर्षक रंग-रोगन, पारंपरिक चित्रकारी और रंग-बिरंगी सजावट से भव्य रूप दिया गया है। अंतिम चरण के सभी कार्य पूरे कर लिए गए हैं और पूरा परिसर आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर है।
स्नान यात्रा के दौरान भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा तथा सुदर्शन चक्र को मंदिर परिसर के स्नान मंडप पर लाकर विधि-विधान के साथ 108 पवित्र कलशों में भरे गए जल से स्नान कराया जाएगा।
यह जल मंदिर परिसर स्थित पवित्र सुना कुआं से विशेष धार्मिक परंपराओं के अनुसार लाया जाता है। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच होने वाला यह दिव्य स्नान श्रीजगन्नाथ परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन माना जाता है।
इस अनुष्ठान के दौरान भगवान के दर्शन को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इसी कारण हर वर्ष लाखों श्रद्धालु स्नान यात्रा में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचते हैं।
स्नान के बाद शुरू होगी 15 दिनों की अणसर अवधि
स्नान यात्रा के बाद मान्यता है कि भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को ज्वर हो जाता है। इसके बाद वे अनसर अवधि में प्रवेश करते हैं, जो लगभग 15 दिनों तक चलती है।
इस दौरान तीनों विग्रहों के सार्वजनिक दर्शन बंद रहते हैं। भगवान विशेष कक्ष में विश्राम करते हैं और उनके उपचार से जुड़े पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं। अणसर अवधि समाप्त होने के बाद भगवान नवयौवन वेश में भक्तों को दर्शन देते हैं और फिर विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा में अपने रथों पर आरूढ़ होकर श्रीगुंडिचा मंदिर की यात्रा करते हैं।
रथयात्रा की शुरुआत का महत्वपूर्ण पड़ाव है स्नान यात्रा
स्नान यात्रा को वार्षिक रथयात्रा महोत्सव का प्रारंभिक और अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन माना जाता है। इसके साथ ही रथयात्रा से जुड़े विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हो जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्नान यात्रा भगवान के मानव स्वरूप और उनके भक्तों के साथ आत्मीय संबंध का प्रतीक है। यह आयोजन भगवान की लोककल्याणकारी भावना और सनातन परंपरा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाता है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम
लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पुरी जिला प्रशासन और ओडिशा पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए हैं।
मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष बैरिकेडिंग की गई है तथा प्रमुख मार्गों पर यातायात नियंत्रण की व्यवस्था लागू की गई है।
श्रद्धालुओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा आपातकालीन चिकित्सा दल, अग्निशमन कर्मी, आपदा प्रबंधन टीमें तथा त्वरित प्रतिक्रिया दल भी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
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