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विदेशों में भारतीय नागरिकता साबित करने पर उठ रहे सवाल
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प्रवासी भारतीयों ने इंडो एशियन टाइम्स को बताई अपनी पीड़ा
हेमंत कुमार तिवारी, भुवनेश्वर।
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा यह कहे जाने के बाद कि पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं, विदेशों में रह रहे लाखों प्रवासी भारतीयों की परेशानियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। वर्षों से भारतीय पासपोर्ट को विदेशों में भारतीय नागरिकता का सबसे विश्वसनीय सरकारी दस्तावेज माना जाता रहा है, लेकिन इस बयान के बाद कई देशों में भारतीयों से नागरिकता को लेकर अतिरिक्त सवाल पूछे जाने लगे हैं।
इमीग्रेशन पर मांगा जा रहा नागरिकता का प्रमाण
कई प्रवासी भारतीयों ने इंडो एशियन टाइम्स को फोन कर बताया कि कुछ देशों में आव्रजन अधिकारियों द्वारा उनसे पूछा जा रहा है कि यदि भारत सरकार स्वयं कह रही है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो वे किस आधार पर यह मानें कि पासपोर्ट धारक भारतीय नागरिक है। ऐसे मामलों में कुछ लोगों से भारतीय नागरिकता का अलग प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए भी कहा गया।
‘अब हम भारतीय नागरिक कैसे साबित करें?’
विदेशों में रहने वाले भारतीयों का कहना है कि उनके पास भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए पासपोर्ट के अलावा कोई अलग सरकारी प्रमाण पत्र नहीं है। उनका सवाल है कि यदि पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा, तो विदेशों में रहने वाले सामान्य भारतीय अपनी नागरिकता किस दस्तावेज के आधार पर सिद्ध करेंगे।
कई देशों से इंडो एशियन टाइम्स को आए फोन
संयुक्त अरब अमीरात तथा अन्य देशों में रह रहे कई प्रवासी भारतीयों ने इंडो एशियन टाइम्स से संपर्क कर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उनका कहना है कि भारत सरकार के इस बयान के बाद भविष्य में अंतरराष्ट्रीय यात्रा, वीजा, बैंकिंग, रोजगार तथा अन्य सरकारी प्रक्रियाओं के दौरान अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
प्रवासी भारतीयों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस विषय पर तत्काल स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि विदेशों में भारतीय दूतावासों, विदेशी सरकारों और आव्रजन अधिकारियों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो विदेशों में रहने वाले लाखों भारतीयों को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
बयान के बाद बढ़ी बहस
विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद देश और विदेश में पासपोर्ट तथा भारतीय नागरिकता को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। प्रवासी भारतीयों का कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो सामान्य भारतीय नागरिक के लिए नागरिकता सिद्ध करने का अधिकृत दस्तावेज आखिर कौन-सा होगा।
भारतीय मजदूर संघ ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की
भारतीय मजदूर संघ, ओडिशा प्रदेश के अध्यक्ष बादल महाराणा ने विदेश मंत्रालय के उस बयान पर गंभीर चिंता जताई है, जिसमें पासपोर्ट को केवल यात्रा दस्तावेज बताया गया है। उन्होंने कहा कि इस बयान के बाद विदेशों में कार्यरत भारतीय श्रमिकों, कर्मचारियों और पेशेवरों के सामने व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जब तक भारतीय नागरिकता के लिए कोई वैकल्पिक स्थायी प्रमाण पत्र की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक विदेशों में रहने और काम करने वाले भारतीयों के लिए पासपोर्ट को ही भारतीय नागरिकता के प्रमाण के रूप में मान्यता देने संबंधी स्पष्ट घोषणा की जाए।
बादल महाराणा ने कहा कि ओडिशा सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रमिक, तकनीकी कर्मचारी, इंजीनियर, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य पेशेवर रोजगार के लिए विदेश जाते हैं। विशेष रूप से ओडिशा के केंद्रपाड़ा, गंजाम समेत कई जिलों से लाखों लोग खाड़ी देशों, यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य देशों में कार्यरत हैं। यदि पासपोर्ट की वैधता को लेकर इस प्रकार का भ्रम बना रहा, तो विदेशों में काम कर रहे भारतीयों को आव्रजन, रोजगार, बैंकिंग और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को अपने बयान पर पुनर्विचार करते हुए तत्काल ऐसी स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे। उनका कहना है कि जब तक नागरिकता के लिए कोई नया और सार्वभौमिक रूप से स्वीकार्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक पासपोर्ट को ही भारतीय नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार किए जाने की स्थिति बनाए रखना देशहित और प्रवासी भारतीयों के हित में होगा।
बादल महाराणा ने कहा कि इससे न केवल विदेशों में भारत की विश्वसनीयता और साख बनी रहेगी, बल्कि रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय के लिए विदेश जाने वाले लाखों भारतीयों को भी अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की, ताकि विदेशों में कार्यरत भारतीय श्रमिकों और अन्य नागरिकों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए स्थायी नागरिकता पहचान व्यवस्था की मांग
बादल महाराणा ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसी स्थायी व्यवस्था विकसित करे, जिसके तहत रोजगार, व्यवसाय, शोध, उच्च शिक्षा अथवा अन्य वैध उद्देश्यों से विदेश जाने वाले प्रत्येक भारतीय नागरिक को सुविधाजनक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य भारतीय नागरिक पहचान पत्र अथवा नागरिकता के स्थायी प्रमाण का दस्तावेज उपलब्ध कराया जा सके। उनका कहना है कि इससे विदेशों में भारतीय नागरिकों को अपनी नागरिकता सिद्ध करने में किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
विदेशों में भारतीयों को मानसिक तनाव से बचाना सरकार की जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि वैध वीजा पर विदेश गए किसी भी भारतीय नागरिक को अनावश्यक मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में नहीं रहना चाहिए। ऐसे नागरिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि जब तक नागरिकता के स्थायी प्रमाण की कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू नहीं हो जाती, तब तक पासपोर्ट को ही भारतीय नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार किए जाने संबंधी स्पष्ट घोषणा जारी की जाए, ताकि विदेशों में रह रहे और काम कर रहे लाखों भारतीयों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के बारे में
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की स्थापना 23 जुलाई 1955 को स्वर्गीय दत्तोपंत ठेंगड़ी ने की थी। यह भारत का सबसे बड़ा श्रमिक संगठन माना जाता है और देश के लगभग सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में इसकी इकाइयाँ कार्यरत हैं। बीएमएस का उद्देश्य श्रमिकों के आर्थिक, सामाजिक और व्यावसायिक हितों की रक्षा करना, सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों को बढ़ावा देना तथा श्रमिकों, उद्योगों और राष्ट्रहित के बीच संतुलित एवं समन्वयकारी औद्योगिक संबंध स्थापित करना है। संगठन का मानना है कि श्रमिकों का कल्याण, उद्योगों की प्रगति और राष्ट्रीय विकास एक-दूसरे के पूरक हैं।
बीएमएस देश के संगठित एवं असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अंतर्गत विनिर्माण उद्योग, सार्वजनिक उपक्रम, परिवहन, खनन, इस्पात, ऊर्जा, बैंकिंग, बीमा, डाक, दूरसंचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, निर्माण, बंदरगाह, सूचना प्रौद्योगिकी तथा सेवा क्षेत्र सहित अनेक क्षेत्रों के कर्मचारी और श्रमिक जुड़े हुए हैं। संगठन समय-समय पर श्रम कानूनों, सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, रोजगार सृजन, श्रमिक कल्याण, कौशल विकास, प्रवासी श्रमिकों के अधिकार और श्रम सुधारों जैसे विषयों पर सरकार एवं संबंधित संस्थाओं के समक्ष अपने सुझाव और मांगें रखता है। भारत के श्रमिक आंदोलन में बीएमएस की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है और विभिन्न राष्ट्रीय श्रम परामर्श समितियों तथा औद्योगिक मंचों पर इसकी सक्रिय भागीदारी रहती है।
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