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सिमिलिपाल में बाघिन जीनत शावकों संग जंगल में कर रही है विचरण

  •     बाघ संरक्षण अभियान को मिली नई मजबूती

  •     महाराष्ट्र से लाई गई बाघिन ने चार स्वस्थ शावकों को दिया था जन्म

  •     तस्वीरों ने बढ़ाई वन्यजीव प्रेमियों की खुशी

  •     सिमिलिपाल में बाघों की नई पीढ़ी से बढ़ी संरक्षण की उम्मीद

मयूरभंज। सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व (एसटीआर) से आईं ताजा तस्वीरों ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई उम्मीद जगा दी है। रिजर्व प्रशासन द्वारा जारी तस्वीरों में बाघिन जीनत अपने नन्हें शावकों के साथ जंगल में निर्भय होकर विचरण करती दिखाई दे रही है। इन तस्वीरों ने न केवल वन अधिकारियों और संरक्षण विशेषज्ञों को उत्साहित किया है, बल्कि देशभर के वन्यजीव प्रेमियों का भी ध्यान आकर्षित किया है।

वन अधिकारियों के अनुसार, जीनत के शावक अब लगभग दो माह के हो चुके हैं। तस्वीरों में वे पूरी तरह स्वस्थ, सक्रिय और अपनी मां की निगरानी में जंगल के वातावरण से परिचित होते दिखाई दे रहे हैं। कहीं बाघिन उन्हें अपने साथ लेकर आगे बढ़ रही है तो कहीं वे उसके पीछे-पीछे चलते हुए जंगल में नई दुनिया को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

पिछले महीने हुई थी चार शावकों के जन्म की पुष्टि

सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व ने पिछले महीने पुष्टि की थी कि जीनत ने चार शावकों को जन्म दिया है। अब जारी नई तस्वीरों से स्पष्ट हो गया है कि सभी शावक स्वस्थ हैं और सामान्य रूप से विकसित हो रहे हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि यह संकेत बेहद सकारात्मक है, क्योंकि शुरुआती महीनों में शावकों का सुरक्षित रहना और स्वस्थ विकास बाघ संरक्षण की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

तस्वीरों में जीनत अपने शावकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क दिखाई दे रही है। वह उन्हें जंगल के सुरक्षित हिस्सों में ले जाकर प्राकृतिक परिस्थितियों से परिचित करा रही है, जिससे वे धीरे-धीरे स्वतंत्र जीवन के लिए तैयार हो सकें।

महाराष्ट्र से सिमिलिपाल लाई गई थी जीनत

जीनत को वर्ष 2024 में महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से सिमिलिपाल लाया गया था। उस समय उसकी आयु लगभग ढाई वर्ष थी। इस स्थानांतरण का मुख्य उद्देश्य सिमिलिपाल में बाघों की आनुवंशिक विविधता बढ़ाना और यहां बाघों की आबादी को मजबूत बनाना था।

विशेषज्ञों का मानना था कि सीमित आनुवंशिक विविधता भविष्य में बाघों के स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए दूसरे अभयारण्यों से स्वस्थ बाघों को लाकर नई रक्तरेखा विकसित करने की योजना बनाई गई थी। जीनत का सफलतापूर्वक नए वातावरण में खुद को ढालना और फिर चार शावकों को जन्म देना इस संरक्षण योजना की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

सभी शावक सामान्य बंगाल टाइगर जैसे स्वस्थ

वन विभाग के अनुसार, जीनत के चारों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य रॉयल बंगाल टाइगर की तरह विकसित हो रहे हैं। इससे यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि सिमिलिपाल में शुरू किया गया बाघ स्थानांतरण कार्यक्रम सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि पहले जहां सीमित प्रजनन को लेकर चिंताएं थीं, वहीं अब नई पीढ़ी के आगमन से भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

कैमरा ट्रैप से हो रही है लगातार निगरानी

सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व के अधिकारी बाघिन और उसके शावकों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। इसके लिए जंगल में लगाए गए कैमरा ट्रैप, निगरानी दल और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि जीनत और उसके सभी शावक स्वस्थ हैं तथा सामान्य रूप से जंगल में विचरण कर रहे हैं। फिलहाल उन्हें किसी प्रकार का खतरा नहीं है और उनकी सुरक्षा के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

तस्वीरों ने जीता लोगों का दिल

रिजर्व प्रशासन द्वारा साझा की गई तस्वीरों में जीनत अपने शावकों को बेहद स्नेह और सतर्कता के साथ संभालती नजर आ रही है। कुछ तस्वीरों में वह शावकों को मुंह से उठाकर सुरक्षित स्थान तक ले जाती दिखाई देती है। इन भावनात्मक दृश्यों ने सामाजिक माध्यमों पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया है और वन्यजीव संरक्षण के प्रति सकारात्मक संदेश दिया है।

देश के बाघ संरक्षण अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि

विशेषज्ञों का मानना है कि एक अभयारण्य से दूसरे अभयारण्य में बाघों का वैज्ञानिक तरीके से स्थानांतरण भविष्य में अंतःप्रजनन की समस्या को कम करने और बाघों की आबादी को अधिक मजबूत एवं स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जीनत का महाराष्ट्र से ओडिशा तक का सफर, नए वातावरण में सफल अनुकूलन और मातृत्व की यह उपलब्धि दोनों राज्यों के वन विभागों के समन्वित प्रयासों की सफलता का उदाहरण बन गई है।

काले धारियों वाले बाघों के लिए प्रसिद्ध है सिमिलिपाल

सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व अपने दुर्लभ मेलानिस्टिक (गहरी काली धारियों वाले) बाघों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां की विशिष्ट बाघ आबादी लंबे समय से वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों के अध्ययन का विषय रही है।

अब जीनत और उसके चार शावकों के जुड़ने से सिमिलिपाल की बाघ आबादी और अधिक सशक्त होने की उम्मीद बढ़ गई है। वन अधिकारी और प्रकृति प्रेमी आने वाले समय में इस बाघ परिवार की नई तस्वीरों और गतिविधियों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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