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भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन पर भोजन, स्वास्थ्य जांच और परिवहन की विशेष व्यवस्था
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12 श्रमिकों की मौत के बाद सरकार ने तेज की राहत एवं पुनर्वास प्रक्रिया
भुवनेश्वर। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले स्थित एक निजी समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई में अमोनिया गैस रिसाव की दर्दनाक घटना के बाद ओडिशा सरकार ने प्रभावित प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षित वापसी के लिए बड़ा कदम उठाया है। हादसे में 12 ओड़िया श्रमिकों की मौत के एक सप्ताह बाद शनिवार को राज्य सरकार की पहल पर 62 प्रवासी श्रमिकों को सकुशल ओडिशा वापस लाया गया।
चेन्नई से विशेष व्यवस्था के तहत लौटे इन श्रमिकों का भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन पर स्वागत किया गया। राज्य सरकार ने उनके लिए भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य परीक्षण, विश्राम तथा उनके गृह जिलों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए परिवहन की व्यापक व्यवस्था की।
सबसे अधिक श्रमिक केंदुझर जिले के
लौटे हुए 62 श्रमिकों में 58 श्रमिक केंदुझर जिले के हैं, जबकि अन्य श्रमिक कोरापुट, रायगड़ा, मयूरभंज और ढेंकानाल जिलों से संबंधित हैं।
इनमें 35 महिला श्रमिक शामिल हैं, जो सभी केंदुझर जिले की निवासी हैं। इसके अलावा 27 पुरुष श्रमिकों में 23 केंदुझर तथा एक-एक श्रमिक कोरापुट, रायगड़ा, मयूरभंज और ढेंकानाल से हैं।
राज्य सरकार ने सभी श्रमिकों को उनके गृह जिलों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए विशेष बसों की व्यवस्था की, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
21 जून को हुआ था दर्दनाक अमोनिया गैस रिसाव
यह राहत अभियान 21 जून को तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में चेन्नई के निकट स्थित सेंट पीटर एंड पॉल सी फूड्स एक्सपोर्ट्स कंपनी में हुए भीषण अमोनिया गैस रिसाव हादसे के बाद शुरू किया गया। इस औद्योगिक दुर्घटना को हाल के वर्षों में प्रवासी श्रमिकों से जुड़ी सबसे भयावह घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
गैस रिसाव के दौरान बड़ी संख्या में ओडिशा के श्रमिक फैक्टरी में कार्यरत थे। जहरीली गैस फैलने से कई श्रमिक बेहोश हो गए और अनेक लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए। हादसे में 12 ओड़िया श्रमिकों की जान चली गई, जिससे पूरे राज्य में शोक की लहर फैल गई।
पांच श्रमिक अब भी जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं
श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हादसे में घायल पांच श्रमिकों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उनका इलाज चेन्नई के वेल्स अस्पताल, श्री वेंकटेश्वर अस्पताल, स्टेनली चिकित्सा महाविद्यालय तथा राजीव गांधी सरकारी अस्पताल में चल रहा है।
सभी गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को जीवनरक्षक प्रणाली (वेंटिलेटर) पर रखा गया है। चिकित्सकों की एक विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
तमिलनाडु सरकार और अस्पतालों से लगातार संपर्क में ओडिशा सरकार
ओडिशा श्रम विभाग ने बताया कि तमिलनाडु सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय स्थापित किया गया है। विभाग के अधिकारी अस्पतालों के चिकित्सकों और प्रशासन के साथ नियमित संपर्क बनाए हुए हैं तथा घायलों की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक सभी घायल श्रमिक पूरी तरह स्वस्थ होकर घर नहीं लौट आते, तब तक आवश्यक सहायता और समन्वय जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 लाख रुपये की सहायता
इस हृदयविदारक घटना के बाद ओडिशा सरकार ने मृतक प्रत्येक श्रमिक के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने की घोषणा की है।
सरकार ने कहा है कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ अन्य आवश्यक सरकारी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे इस कठिन समय में स्वयं को संभाल सकें।
प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
तमिलनाडु की इस घटना ने एक बार फिर दूसरे राज्यों में कार्यरत ओडिशा के प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, कार्यस्थलों पर औद्योगिक सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में ओडिशा के श्रमिक रोजगार के लिए विभिन्न राज्यों में कार्यरत हैं। ऐसे में औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन और प्रवासी श्रमिकों के लिए प्रभावी सुरक्षा तंत्र विकसित करना समय की आवश्यकता बन गया है।
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, पंजीकरण, नियमित निगरानी तथा संकट की स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए और अधिक प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाएगी।
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