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11 जुलाई को होगी न्यायाधिकरण की अगली सुनवाई
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ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच कई मुद्दों पर बनी सहमति
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जल बंटवारे से जुड़े शेष विवादों पर जारी है मंथन
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20 बैठकों में तकनीकी समिति ने तैयार किया समाधान का आधार
भुवनेश्वर। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच वर्षों से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इस मामले की सुनवाई कर रहे महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने शनिवार को दोनों राज्यों के बीच विवादित मुद्दों के समाधान की प्रगति की समीक्षा की। न्यायाधिकरण ने अगली सुनवाई की तिथि 11 जुलाई निर्धारित की है।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले कई दौर की बैठकों और तकनीकी स्तर पर हुए विस्तृत विचार-विमर्श के बाद दोनों राज्यों के बीच कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है। हालांकि, नदी के जल आवंटन और जल बंटवारे से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी अंतिम सहमति बनना बाकी है, जिन पर दोनों पक्ष लगातार चर्चा कर रहे हैं।
अगली सुनवाई से पहले होगी वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक
न्यायाधिकरण की अगली सुनवाई से पहले ओडिशा और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच शेष मतभेदों को कम करना और ऐसे समाधान तक पहुंचना है, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें।
सूत्रों के अनुसार, दोनों राज्यों के अधिकारी जल उपलब्धता, जल भंडारण, उपयोग तथा भविष्य की आवश्यकताओं से जुड़े आंकड़ों का मिलान कर रहे हैं, ताकि किसी भी निर्णय का आधार वैज्ञानिक और तथ्यात्मक हो।
20 बैठकों में तकनीकी समिति ने किया विस्तृत अध्ययन
महानदी विवाद के समाधान के लिए गठित तकनीकी समिति अब तक 20 बैठकों का आयोजन कर चुकी है। इन बैठकों में दोनों राज्यों की वर्तमान और भविष्य की जल आवश्यकताओं का विस्तृत आकलन किया गया है।
समिति ने जलाशयों में संग्रहित पानी, सिंचाई, पेयजल, औद्योगिक उपयोग तथा अन्य आवश्यकताओं से जुड़े आंकड़ों की तुलना कर दोनों राज्यों के दावों का तकनीकी परीक्षण किया है। अधिकारियों का कहना है कि इन बैठकों से विवाद के कई पहलुओं पर स्पष्टता आई है और समाधान की दिशा में ठोस आधार तैयार हुआ है।
सात दौर की वार्ता के बाद कई विवादित मुद्दे सुलझे
ओडिशा की ओर से न्यायाधिकरण में उपस्थित महाधिवक्ता पितांबर आचार्य ने सुनवाई के बाद बताया कि अब तक सात दौर की विस्तृत वार्ता हो चुकी है और इन बैठकों में कई महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान सहमति के आधार पर निकाला गया है।
उन्होंने कहा कि जल बंटवारे से जुड़े प्रमुख विषयों पर दोनों राज्यों के बीच सकारात्मक माहौल में बातचीत आगे बढ़ रही है। विशेष रूप से दोनों राज्यों की जल आवश्यकता, नदी के पानी के उपयोग तथा विभिन्न परियोजनाओं में संग्रहित जल की मात्रा से संबंधित आंकड़ों का समन्वय किया जा रहा है।
पितांबर आचार्य ने विश्वास जताया कि यह मामला धीरे-धीरे ऐसे समाधान की ओर बढ़ रहा है, जिसे दोनों राज्य स्वीकार कर सकें। उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी और उससे पहले होने वाली अधिकारियों की बैठक विवाद के शेष बिंदुओं को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
दोनों राज्यों की ओर से वरिष्ठ विधि अधिकारियों ने रखा पक्ष
शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान ओडिशा सरकार की ओर से महाधिवक्ता पितांबर आचार्य ने पक्ष रखा, जबकि छत्तीसगढ़ सरकार का प्रतिनिधित्व महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने किया।
दोनों पक्षों ने न्यायाधिकरण के समक्ष अब तक हुई प्रगति और तकनीकी समिति की बैठकों में लिए गए निर्णयों की जानकारी प्रस्तुत की।
वर्षों पुराना है महानदी जल विवाद
महानदी ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। पिछले कई वर्षों से दोनों राज्यों के बीच नदी के जल उपयोग, बांधों के निर्माण, जल भंडारण तथा जल बंटवारे को लेकर विवाद चलता आ रहा है।
ओडिशा का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ में महानदी और उसकी सहायक नदियों पर बनाए गए विभिन्न बैराज और जल संरचनाओं के कारण राज्य में जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है। वहीं, छत्तीसगढ़ का कहना है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों का नियमानुसार उपयोग कर रहा है।
इसी विवाद के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था, जो दोनों राज्यों के दावों, तकनीकी रिपोर्टों और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर समाधान तलाश रहा है।
सर्वसम्मति से समाधान की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी समिति की लगातार बैठकों और दोनों राज्यों के बीच संवाद से विवाद के समाधान की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। यदि शेष मुद्दों पर भी सहमति बन जाती है तो वर्षों पुराने इस जल विवाद का स्थायी समाधान निकल सकता है।
अब सभी की नजर 11 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर है, जहां न्यायाधिकरण दोनों राज्यों के बीच हुई नई प्रगति की समीक्षा करेगा और विवाद के अंतिम समाधान की दिशा में आगे की प्रक्रिया तय करेगा।
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