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गजपति कापिलेंद्र देव के राज्याभिषेक के 591 वर्ष पूर्ण होने पर होगा कार्यक्रम
भुवनेश्वर। ओडिशा में 29 जून 1435 को कृतिवास कटक में गजपति वंश के संस्थापक गजपति कापिलेंद्र देव का राज्याभिषेक हुआ था। उनका साम्राज्य काशी से लेकर रामेश्वरम तक विस्तृत था। इसी ऐतिहासिक विरासत को स्मरण करते हुए ओडिशा इस वर्ष उनके 591वें राज्याभिषेक दिवस के अवसर पर एक भव्य आयोजन करने जा रहा है।
‘बियॉन्ड हेरिटेज ट्रस्ट’, उत्कल विश्वविद्यालय और ओडिशा साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में ‘गजपति दिवस एट 591’ का आयोजन 29 जून 2026 को भुवनेश्वर स्थित एमकेसीजी ऑडिटोरियम, उत्कल विश्वविद्यालय में प्रातः 10 बजे किया जाएगा।
कार्यक्रम में ओडिशा सरकार के भाषा, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। वहीं हरियाणा साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष एवं प्रख्यात इतिहासकार प्रो. कुलदीप चंद अग्रिहोत्री विशिष्ट अतिथि होंगे। उत्तर ओडिशा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो प्रफुल्ल कुमार मिश्र मुख्य वक्ता के रूप में संबोधन देंगे।
इसके अतिरिक्त कटक सांसद भर्तृहरि महताब, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक एवं ओडिशा रिसर्च सेंटर के ट्रस्टी सदस्य प्रो किशोर कुमार बासा तथा पद्मश्री अद्वैत चरण गड़नायक विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उत्कल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो चंद्रप्रसाद नंद, ओडिशा साहित्य अकादमी के सचिव डॉ चंद्रशेखर होता तथा बियॉन्ड हेरिटेज ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं प्रख्यात वास्तुकार सुभाष मोहंती भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
तीन घंटे के इस कार्यक्रम की शुरुआत “समर, सम्राट और सनातन: गजपति कापिलेंद्र देव” नामक विशेष प्रदर्शनी के उद्घाटन से होगी, जिसमें उनके सैन्य अभियानों, साम्राज्य विस्तार और ऐतिहासिक उपलब्धियों को मानचित्रों, अभिलेखों और प्रतिकृतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
इसके बाद उनके जीवन पर आधारित एक एनिमेटेड शॉर्ट फिल्म “लाखे राजार मउडमणि: गजपतिंक गौरवमय गाथा” का लोकार्पण किया जाएगा, जिसे ओडिशा के इतिहास को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया है।
कार्यक्रम के दौरान दो पैनल चर्चाएं भी आयोजित होंगी। पहली चर्चा “ओडिशा के गौरवशाली इतिहास के संदर्भ में शोध एवं शिक्षा का पुनर्जागरण” विषय पर होगी, जिसमें स्वतंत्र शोधकर्ता दीपक कुमार नायक, पूर्व मुख्य सचिव प्रदीप कुमार जेना तथा प्रो किशोर कुमार बसु अपने विचार रखेंगे। दूसरी चर्चा “क्षेत्रीय नायक से राष्ट्रीय प्रतीक तक” विषय पर होगी, जिसमें एस सत्यजीत ओझा, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक अनुपम पटनायक तथा प्रसिद्ध कवि एवं स्तंभकार हरप्रसाद दास भाग लेंगे।
आयोजकों के अनुसार यह आयोजन केवल एक बार का कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि इसे हर वर्ष मनाए जाने वाले वार्षिक स्मृति दिवस के रूप में संस्थागत रूप देने की योजना है। साथ ही ओडिया अभिलेख विज्ञान और इतिहास के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए एक विशेष पुरस्कार शुरू करने की भी घोषणा की गई है।
इतिहासकारों के अनुसार गजपति कापिलेंद्र देव मध्यकालीन भारत के सबसे शक्तिशाली लेकिन अपेक्षाकृत कम चर्चित शासकों में से एक थे। उन्होंने विशाल साम्राज्य का संचालन, प्रशासनिक सुधार और सैन्य अभियानों के माध्यम से एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विरासत छोड़ी, जिसे यह आयोजन नई पहचान देने का प्रयास है।
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