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लेटर ऑफ क्रेडिट स्वीकार करने से परहेज
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प्री-शिपमेंट ऋण नहीं मिलने से प्रभावित हो रहा निर्यात
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उद्योग जगत ने उठाए गंभीर सवाल
हेमन्त कुमार तिवारी, भुवनेश्वर।
ओडिशा के स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तथा निर्यातक इन दिनों बैंकिंग व्यवस्था की कार्यशैली को लेकर गंभीर असंतोष जता रहे हैं। उद्योग जगत का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मान्य भुगतान सुरक्षा व्यवस्था लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) होने के बावजूद कई बैंक निर्यातकों को आवश्यक प्री-शिपमेंट ऋण (पैकिंग क्रेडिट) उपलब्ध कराने में उदासीन रवैया अपना रहे हैं। इसका परिणाम यह हो रहा है कि राज्य के नियार्तक बड़ी मात्रा के आर्डर नहीं ले पा रहे हैं। इससे अरबों रुपये के संभावित निर्यात ऑर्डर भी गंवाने पड़ रहे हैं।
वैश्विक व्यापार में लेटर ऑफ क्रेडिट का होता है महत्वपूर्ण स्थान
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लेटर ऑफ क्रेडिट को सबसे सुरक्षित भुगतान माध्यमों में से एक माना जाता है। इसके माध्यम से खरीदार का बैंक निर्यातक को भुगतान की गारंटी देता है, जिससे निर्यातक को माल तैयार करने और भेजने में वित्तीय सुरक्षा मिलती है। इसी आधार पर बैंक सामान्यतः निर्यातकों को पैकिंग क्रेडिट अथवा प्री-शिपमेंट वित्त उपलब्ध कराते हैं।
हालांकि ओडिशा के कई निर्यातकों का आरोप है कि व्यवहार में उन्हें यह सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही है।
प्री-शिपमेंट क्रेडिट नहीं मिलने से उत्पादन पर असर
निर्यातकों का कहना है कि विदेशी खरीदारों से ऑर्डर मिलने के बाद कच्चा माल खरीदने, पैकेजिंग, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और परिवहन जैसी प्रारंभिक आवश्यकताओं के लिए कार्यशील पूंजी की जरूरत होती है। यदि समय पर प्री-शिपमेंट ऋण उपलब्ध नहीं हो, तो उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित होती है और तय समय सीमा में माल भेजना संभव नहीं हो पाता।
एक निर्यातक का कहना है कि कई मामलों में विदेशी खरीदार समयसीमा का पालन न होने पर ऑर्डर रद्द कर देते हैं, जिससे देश को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। बैंकों के उदासीन रवैया के कारण भविष्य के लिए दरवाजे भी बंद हो जाते हैं।
स्टार्टअप सबसे अधिक प्रभावित
नए स्टार्टअप और एमएसएमई का कहना है कि उनके पास पर्याप्त संपार्श्विक (कोलेटरल) नहीं होने के कारण बैंक अतिरिक्त गारंटी की मांग करते हैं या ऋण प्रक्रिया को लंबा खींच देते हैं। इससे नए उद्यम अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने से पहले ही कमजोर पड़ जाते हैं। हालांकि खरीदार बैंक गारंटी देता है, लेकिन बैंक अधिकारियों की मूर्खता पूर्ण रवैये के कारण डील हाथ से निकल जाते हैं।
उद्यमियों का कहना है कि यदि समय पर बैंकिंग सहायता मिले तो ओडिशा से कृषि उत्पाद, मसाले, खाद्य सामग्री, हर्बल उत्पादों का निर्यात कई गुना बढ़ सकता है।
नियमों के प्रभावी पालन की मांग
उद्योग संगठनों का कहना है कि भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट ऋण की व्यवस्था मौजूद है। उनका आरोप है कि कई मामलों में इन प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है, जिससे निर्यातकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उद्योग जगत ने मांग की है कि बैंकों को निर्यात वित्त से जुड़े प्रावधानों का पारदर्शी और समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं।
सरकार और बैंकिंग क्षेत्र से हस्तक्षेप की मांग
निर्यातकों ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और संबंधित बैंक प्रबंधन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बैंक अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अनुरूप कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराएं, तो ओडिशा के स्टार्टअप और एमएसएमई वैश्विक बाजार में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं तथा राज्य के निर्यात, निवेश और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
लेटर ऑफ क्रेडिट मिलते ही मिले सिंगल विंडो प्री-शिपमेंट क्रेडिट सुविधा
एक निर्यातक का कहना है कि जिन निर्यातकों के पास मान्य अंतरराष्ट्रीय लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) उपलब्ध हो, उनके लिए सिंगल विंडो एक्सपोर्ट क्रेडिट प्रणाली लागू की जानी चाहिए। इसके तहत एलसी की पुष्टि होते ही बैंक निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्री-शिपमेंट (पैकिंग क्रेडिट) और आवश्यक कार्यशील पूंजी स्वीकृत करें, ताकि निर्यातकों को अलग-अलग शाखाओं और विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें। इससे उत्पादन, पैकेजिंग और समय पर निर्यात सुनिश्चित होगा, ऑर्डर रद्द होने की आशंका कम होगी, विदेशी खरीदारों का विश्वास बढ़ेगा तथा ओडिशा के स्टार्टअप, एमएसएमई और निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का बेहतर अवसर मिलेगा।
फॉरेक्स विभाग में विशेषज्ञता की कमी से निर्यातकों की बढ़ रही मुश्किलें
निर्यातकों का कहना है कि राज्य के कई बैंकों के विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) विभागों में अनुभवी और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनका आरोप है कि कई अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रयुक्त लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) की कार्यप्रणाली, उसके विभिन्न प्रकार, भुगतान प्रक्रिया तथा अलग-अलग एलसी संरचनाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं होती। ऐसे में निर्यातकों को बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत करने, अनावश्यक स्पष्टीकरण देने और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिससे निर्यात सौदों में देरी होती है।
निर्यातकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े मामलों के लिए बैंकों के फॉरेक्स विभागों में विशेष रूप से प्रशिक्षित और अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए। साथ ही समय-समय पर उन्हें वैश्विक बैंकिंग नियमों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार वित्त, लेटर ऑफ क्रेडिट के विभिन्न प्रकार और विदेशी व्यापार से जुड़े नवीनतम मानकों का प्रशिक्षण दिया जाए। इससे निर्यातकों को बेहतर बैंकिंग सहायता मिलेगी, निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और ओडिशा के उद्यम वैश्विक बाजार में अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
विशेषज्ञों की राय
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी निर्यातक के पास वैध निर्यात ऑर्डर, उचित दस्तावेज और बैंकिंग मानकों के अनुरूप लेटर ऑफ क्रेडिट उपलब्ध है, तो उसके वित्तपोषण संबंधी आवेदन का शीघ्र और निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना चाहिए। साथ ही, यदि किसी आवेदन को अस्वीकार किया जाता है तो उसके कारण स्पष्ट रूप से लिखित रूप में बताए जाने चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और उद्यमियों का बैंकिंग प्रणाली पर विश्वास मजबूत हो।
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