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भारतीय नागरिक पूछ रहे हैं – आखिर कौन सा दस्तावेज साबित करेगा नागरिकता?
नई दिल्ली। भारतीय पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय के एक हालिया स्पष्टीकरण के बाद देश और विदेश में रहने वाले भारतीयों के बीच नागरिकता को लेकर नई बहस छिड़ गई है। मंत्रालय की ओर से यह स्पष्ट किए जाने के बाद कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता, लाखों प्रवासी भारतीयों और आम नागरिकों के मन में अनेक सवाल खड़े हो गए हैं।
वर्षों से आम धारणा रही है कि भारतीय पासपोर्ट किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का सबसे मजबूत प्रमाण है। विदेशों में रहने वाले भारतीय भी अपनी पहचान और राष्ट्रीयता के प्रमाण के रूप में पासपोर्ट का उपयोग करते रहे हैं। ऐसे में विदेश मंत्रालय के बयान ने कई लोगों को हैरान कर दिया है।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
बयान के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने सवाल उठाए कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है तो फिर कौन सा दस्तावेज भारतीय नागरिकता साबित करेगा। कई लोगों ने यह भी पूछा कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और पैन कार्ड जैसी सरकारी पहचानें यदि नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं तो आम नागरिक अपनी नागरिकता कैसे सिद्ध करेंगे।
सरकार ने कहा – यह कोई नई व्यवस्था नहीं
सरकार की ओर से बाद में स्पष्ट किया गया कि यह कोई नई नीति नहीं है। कानूनी रूप से पासपोर्ट हमेशा से एक यात्रा दस्तावेज रहा है। भारतीय नागरिकों को ही पासपोर्ट जारी किया जाता है, लेकिन किसी विवाद या कानूनी जांच की स्थिति में केवल पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाता।
विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिकता का निर्धारण भारतीय नागरिकता अधिनियम और उससे संबंधित नियमों के आधार पर किया जाता है। किसी व्यक्ति की नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण या प्राकृतिककरण जैसे विभिन्न आधारों पर तय होती है।
कौन सा दस्तावेज है नागरिकता का प्रमाण?
यही वह प्रश्न है जिसने सबसे अधिक भ्रम पैदा किया है। भारत में अधिकांश लोगों को जन्म के आधार पर नागरिकता प्राप्त होती है और उन्हें अलग से कोई नागरिकता प्रमाणपत्र नहीं दिया जाता। ऐसे मामलों में जन्म प्रमाणपत्र, माता-पिता से संबंधित अभिलेख, शैक्षणिक रिकॉर्ड तथा अन्य सरकारी दस्तावेज परिस्थितियों के अनुसार नागरिकता स्थापित करने में सहायक माने जाते हैं।
वहीं पंजीकरण या प्राकृतिककरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने वाले लोगों को सरकार द्वारा नागरिकता प्रमाणपत्र जारी किया जाता है, जिसे नागरिकता का प्रत्यक्ष प्रमाण माना जाता है।
आधार, पैन और मतदाता पहचान पत्र की स्थिति
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार आधार कार्ड पहचान और निवास से जुड़ा दस्तावेज है। पैन कार्ड कर संबंधी पहचान के लिए जारी किया जाता है, जबकि मतदाता पहचान पत्र मतदान के अधिकार से जुड़ा दस्तावेज है। इन दस्तावेजों का महत्व अपनी-अपनी जगह है, लेकिन इन्हें नागरिकता का अंतिम और सार्वभौमिक प्रमाण नहीं माना जाता।
प्रवासी भारतीयों में बढ़ी बेचैनी
विदेशों में रहने वाले भारतीयों का कहना है कि अधिकांश देशों में पासपोर्ट को राष्ट्रीयता और नागरिकता का प्रमुख दस्तावेज माना जाता है। ऐसे में भारत सरकार के स्पष्टीकरण के बाद कई प्रवासी भारतीय यह जानना चाहते हैं कि भविष्य में यदि किसी कारणवश उनकी नागरिकता पर प्रश्न उठता है तो वे किस दस्तावेज के आधार पर अपनी भारतीय नागरिकता साबित करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस विषय पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ताकि नागरिकों के बीच पैदा हुआ भ्रम दूर हो सके और लोगों को स्पष्ट रूप से पता चल सके कि विभिन्न परिस्थितियों में नागरिकता सिद्ध करने के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी।
नागरिकता पर फिर शुरू हुई राष्ट्रीय बहस
पासपोर्ट संबंधी इस विवाद ने देश में नागरिकता और पहचान से जुड़े मुद्दों पर नई चर्चा शुरू कर दी है। नागरिकों का मानना है कि डिजिटल युग में सरकार को ऐसी स्पष्ट और एकीकृत व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे किसी भी भारतीय को अपनी नागरिकता सिद्ध करने के लिए भ्रम या असमंजस का सामना न करना पड़े।
विदेश मंत्रालय का बयान भले ही कानूनी दृष्टि से नया न हो, लेकिन इसने नागरिकता संबंधी दस्तावेजों और उनकी वैधता को लेकर लंबे समय से चली आ रही धारणाओं को चुनौती दे दी है। यही कारण है कि यह मुद्दा अब देश और विदेश में रहने वाले भारतीयों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
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