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ओड़िया दैनिक प्रमेय को मिले 7.73 करोड़ रुपये
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सरकार के कुल टीवी विज्ञापन खर्च का 83 प्रतिशत के बराबर अकेले प्रमेय को मिला विज्ञापन
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प्रमेय न्यूज-7 भी टीवी चैनलों में शीर्ष पर
भुवनेश्वर। ओडिशा में भाजपा सरकार के सत्ता संभालने के बाद पिछले 18 महीनों में सरकारी विज्ञापनों के वितरण को लेकर दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। राज्य सरकार ने इस अवधि में विभिन्न मीडिया माध्यमों पर कुल 83.85 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा प्रिंट मीडिया को मिला। विशेष रूप से ओड़िया दैनिक प्रमेय को अकेले 7.73 करोड़ रुपये के विज्ञापन मिले, जो सरकार द्वारा 26 टीवी चैनलों पर किए गए कुल 9.36 करोड़ रुपये के विज्ञापन खर्च का लगभग 83 प्रतिशत है।
यह जानकारी कोरापुट जिले के पोट्टांगी से कांग्रेस विधायक रामचंद्र कदम द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में राज्य सरकार ने विधानसभा में लिखित रूप से दी है।
प्रमेय न केवल विज्ञापन प्राप्त करने वाले समाचार पत्रों की सूची में शीर्ष पर रहा, बल्कि उसका टीवी सहयोगी चैनल प्रमेय न्यूज-7 भी 1.39 करोड़ रुपये के साथ टीवी चैनलों में सबसे बड़ा लाभार्थी बना। इस तरह प्रमेय और प्रमेय न्यूज-7 की मूल कंपनी सुम्मा रियल मीडिया राज्य सरकार के विज्ञापन बजट की सबसे बड़ी लाभार्थी संस्था बनकर उभरी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच 4,28,593 प्रतियों के प्रसार के साथ प्रमेय राज्य का सर्वाधिक प्रसारित समाचार पत्र भी रहा। इसके बाद धरित्री (3,07,592 प्रतियां) और संबाद (2,51,825 प्रतियां) का स्थान रहा।
प्रिंट मीडिया को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
राज्य सरकार ने कुल 69.78 करोड़ रुपये समाचार पत्रों और पत्रिकाओं पर खर्च किए। विज्ञापन प्राप्त करने वाले प्रमुख समाचार पत्रों में प्रमेय के बाद धरित्री को 5.81 करोड़ रुपये, संबाद को 5.32 करोड़ रुपये, टाइम्स ऑफ इंडिया को 4.87 करोड़ रुपये तथा समाज को 4.24 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
सरकार ने कुल 211 प्रिंट प्रकाशनों को विज्ञापन जारी किए, जिनमें 178 ओडिशा आधारित क्षेत्रीय समाचार पत्र, 32 राष्ट्रीय समाचार पत्र और एक मुंबई से प्रकाशित ‘मुंबई ओड़िया समाज’ शामिल है, जिसे 2.94 लाख रुपये मिले।
राष्ट्रीय समाचार पत्रों को कुल 16.71 करोड़ रुपये के विज्ञापन मिले। इनमें टाइम्स ऑफ इंडिया को सर्वाधिक 4.87 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके बाद हिंदुस्तान टाइम्स (1.51 करोड़ रुपये), न्यू इंडियन एक्सप्रेस (1.36 करोड़ रुपये), द हिंदू (1.34 करोड़ रुपये) और इंडियन एक्सप्रेस (1.27 करोड़ रुपये) का स्थान रहा।
टीवी चैनलों पर 9.36 करोड़ रुपये खर्च
राज्य सरकार ने टीवी चैनलों पर कुल 9.36 करोड़ रुपये खर्च किए। प्रमेय न्यूज-7 को सर्वाधिक 1.39 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा कलिंगा टीवी, अर्गस न्यूज, कनक न्यूज, दूरदर्शन केंद्र, न्यूज18 ओड़िया, तरंग, जी सार्थक और नंदीघोष टीवी को भी ओटीवी से अधिक सरकारी विज्ञापन प्राप्त हुए। राज्य के सबसे लोकप्रिय समाचार चैनलों में गिने जाने वाले ओटीवी का स्थान विज्ञापन प्राप्त करने के मामले में दसवां रहा।
डिजिटल मीडिया को अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी
डिजिटल मंचों पर सरकार ने राष्ट्रीय समाचार वेबसाइटों को क्षेत्रीय वेबसाइटों की तुलना में अधिक विज्ञापन दिए। राष्ट्रीय वेबसाइटों को 1.87 करोड़ रुपये मिले, जबकि 25 क्षेत्रीय वेबसाइटों को कुल 16.87 लाख रुपये का विज्ञापन जारी किया गया।
राष्ट्रीय वेबसाइटों में डेलीहंट और वनइंडिया को सर्वाधिक 13.37-13.37 लाख रुपये मिले। इसके बाद न्यूज18, हिंदुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस को 9.87-9.87 लाख रुपये प्राप्त हुए। वहीं आईआरसीटीसी से संबद्ध वेबसाइट को 2.88 लाख रुपये मिले।
क्षेत्रीय वेबसाइटों में ओडिशाटीवी डॉट इन को 2.46 लाख रुपये और ईटीवी भारत को 2.11 लाख रुपये के विज्ञापन प्राप्त हुए।
रेडियो और होर्डिंग्स पर भी खर्च
सरकार ने एफएम रेडियो चैनलों पर 2.15 करोड़ रुपये खर्च किए, जो क्षेत्रीय समाचार वेबसाइटों को दिए गए कुल विज्ञापन खर्च से कहीं अधिक है। इनमें आकाशवाणी को सबसे अधिक 1.07 करोड़ रुपये मिले। सामुदायिक रेडियो स्टेशनों को 12.70 लाख रुपये का विज्ञापन जारी किया गया।
इसके अलावा सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार के लिए राज्य मुख्यालय, जिला कार्यालयों, नगर निकायों और ब्लॉक स्तर पर लगाए गए होर्डिंग्स पर 39.39 लाख रुपये खर्च किए गए।
सरकारी आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि ओडिशा में विज्ञापन वितरण के मामले में प्रिंट मीडिया अब भी सबसे प्रभावशाली माध्यम बना हुआ है, जबकि टीवी, डिजिटल और रेडियो माध्यमों को अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी मिली है।
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