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नारी शक्ति के कारण बढ़ा है रज उत्सव का आकर्षण
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महिलाओं की भूमिका, ओड़िया संस्कृति के संरक्षण तथा प्रकृति एवं परंपरा के महत्व पर विशेष चर्चा
भुवनेश्वर। विश्व ओड़िया परिवार की ओर से राज्य संग्रहालय परिसर में तीसरे दिन भी भव्य एवं दिव्य रज महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं की भूमिका, ओड़िया संस्कृति के संरक्षण तथा प्रकृति एवं परंपरा के महत्व पर विशेष चर्चा की गई।
कार्यक्रम में आस्का लोकसभा क्षेत्र की सांसद अनीता शुभदर्शिनी पटनायक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने अपने संबोधन में रज पर्व के सांस्कृतिक महत्व, महिलाओं की सामाजिक जिम्मेदारियों, प्रकृति और संस्कृति के पारस्परिक संबंध तथा कृषक समाज की तैयारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रज उत्सव ओड़िशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और इसमें नारी शक्ति की केंद्रीय भूमिका रही है।
कार्यक्रम में भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग की अतिरिक्त निदेशक सुचिस्मिता मंत्री, चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव शेखर साहू, सूचना आयुक्त कल्पना पटनायक तथा राज्य संग्रहालय की अध्यक्ष डा भारती पाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व ओड़िया परिवार के अध्यक्ष सज्जन शर्मा ने की।
महोत्सव के दौरान किशोरावस्था से मातृत्व तक महिलाओं के समक्ष आने वाली विभिन्न चुनौतियों और उनके समाधान पर विशेष चर्चा आयोजित की गई। वक्ताओं ने महिला सशक्तिकरण, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण पर जोर दिया।
इस अवसर पर हुलहुली, पूची तथा अन्य पारंपरिक प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सांस्कृतिक प्रेमियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में कालंदी सामल, प्रताप पाणि, संगीता दास, अंजन कुमार देवता, कृपासिंधु मोहंती, कुलमणि राउत, लक्ष्मण पाल, साधु चरण बेहरा, राकेश पाढ़ी, अक्षय कुमार बलियारसिंह, संग्राम स्वाईं, गीता रानी बेहरा, सुब्रत किशोर नायक, त्रिगुण दास महापात्र, सुजीत दास, भवानी मिश्र, रजमित्रा प्रहराज, कनकलता मिश्रा, गौरी कल्याणी, रश्मि रंजन प्रधान, तुलसी बिशोई, सुप्रिया सतपथी, रती मिश्रा और सुरेश साहू सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
वक्ताओं ने कहा कि रज उत्सव केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि नारी सम्मान, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का उत्सव है, जिसकी लोकप्रियता समय के साथ और अधिक बढ़ रही है।
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