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बोले- भगवान जगन्नाथ की परंपराओं से समझौता नहीं होगा
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4.5 करोड़ ओड़ियाओं की भावनाओं का रखा जाएगा सम्मान
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सरकार करेगी आवश्यक कार्रवाई
भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भगवान जगन्नाथ की परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों की अनदेखी कर असमय रथयात्रा आयोजित करने को लेकर इस्कॉन की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार 4.5 करोड़ ओड़ियाओं की आस्था और भावनाओं का सम्मान करते हुए इस मामले में आवश्यक कदम उठाएगी और किसी भी संस्था को श्रीजगन्नाथ संस्कृति की स्थापित परंपराओं से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान जगन्नाथ के प्रत्येक उत्सव और अनुष्ठान का अपना धार्मिक महत्व, निर्धारित समय और विशिष्ट परंपरा है। वर्ष के 12 महीनों में भगवान के 13 प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं और प्रत्येक उत्सव शास्त्रसम्मत नियमों तथा सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार आयोजित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्कॉन द्वारा असमय रथयात्रा आयोजित कर इन परंपराओं का उल्लंघन किया जा रहा है, जिससे ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक मर्यादा प्रभावित होती है।
मोहन माझी ने कहा कि पुरी के गजपति महाराज समय-समय पर इस्कॉन की इस प्रकार की गतिविधियों पर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। इसके अलावा गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य और श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन भी इस विषय पर अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इन सभी पक्षों की चिंताओं को गंभीरता से लिया है और धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की परंपराएं केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं और इनका पालन निर्धारित विधि-विधान के अनुसार ही होना चाहिए। किसी भी प्रकार की मनमानी या स्थापित परंपराओं से छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ अहंकार को कभी स्वीकार नहीं करते। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले भी कई बार पुरी की पवित्र परंपराओं की नकल करने या उन्हें चुनौती देने के प्रयास सफल नहीं हो सके। जो लोग नकारात्मक सोच के साथ धार्मिक परंपराओं का अनादर करते हैं, उन्हें अंततः उसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
मोहन माझी ने दोहराया कि राज्य सरकार भगवान जगन्नाथ की गौरवशाली परंपराओं, मंदिर की मर्यादा और ओड़िया अस्मिता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा इस संबंध में सभी आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
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