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बोले- केवल धर्मांतरण नहीं था दंगों का कारण
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आयोग की रिपोर्ट के गायब होने पर जताई चिंता
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कहा- 2,000 से अधिक पृष्ठों की संवेदनशील रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी गई थी
भुवनेश्वर। ओडिशा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति एएस नायडू ने वर्ष 2008 में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या और उसके बाद कंधमाल में हुए सांप्रदायिक दंगों की जांच से जुड़ी आयोग की रिपोर्ट के रहस्यमय तरीके से गायब होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि दो खंडों में तैयार की गई 2,000 से अधिक पृष्ठों की विस्तृत रिपोर्ट गृह सचिव के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी गई थी और उन्हें आशंका है कि यह कहीं गुम हो गई है।
न्यायमूर्ति नायडू ने स्पष्ट किया कि कंधमाल हिंसा के पीछे धर्मांतरण एक महत्वपूर्ण कारण जरूर था, लेकिन वही अकेला कारण नहीं था। उनके अनुसार, रिपोर्ट में कई अन्य मूलभूत कारणों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें सामाजिक-आर्थिक असमानताएं, कंधा आदिवासी समुदाय का भौगोलिक अलगाव तथा अनुसूचित जाति प्रमाणपत्रों के कथित अनुचित निर्गमन से जुड़े विवाद शामिल हैं।
आयोग का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं
एक एजेंसी को दिए गए बयान में उन्होंने बताया कि आयोग का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह समझना था कि ऐसी त्रासदी क्यों हुई और भविष्य में इसे कैसे रोका जा सकता है। हालांकि रिपोर्ट में प्रशासनिक लापरवाही का उल्लेख किया गया है, जिसके कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर चली गई।
सब्यसाची पंडा की कथित भूमिका की हुई थी जांच
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या में माओवादी संगठन और उसके नेता सब्यसाची पंडा की कथित भूमिका के संबंध में न्यायमूर्ति नायडू ने कहा कि आयोग ने इस पहलू की भी गहन जांच की थी। इस संबंध में निष्कर्ष अंतिम रिपोर्ट में शामिल किए गए थे, जिन्हें अत्यंत गोपनीय मानते हुए मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था। उन्होंने कहा कि समय बीतने के कारण उन्हें अब सभी नाम याद नहीं हैं, लेकिन पूरी जानकारी रिपोर्ट में दर्ज है।
सांप्रदायिक तनाव और हिंसा रोकने को विस्तृत सिफारिशें भी दी
न्यायमूर्ति नायडू ने बताया कि आयोग ने भविष्य में इस प्रकार के सांप्रदायिक तनाव और हिंसा को रोकने के लिए 15 से 16 बिंदुओं वाली विस्तृत सिफारिशें भी दी थीं। उनका मानना है कि किसी भी जांच आयोग की रिपोर्ट संबंधित विभाग द्वारा लागू की जानी चाहिए, उसे मंत्रिमंडल और विधानसभा के समक्ष रखा जाना चाहिए तथा बाद में सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
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