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गृह विभाग ने कैपिटल पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया
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संयुक्त सचिव शरत चंद्र मरांडी ने विस्तृत आपराधिक जांच की मांग
भुवनेश्वर। मुख्यमंत्री कार्यालय से दो महत्वपूर्ण जांच आयोग की रिपोर्टों के कथित रूप से गायब होने को लेकर विवाद और गहरा गया है। गृह विभाग द्वारा राजधानी पुलिस स्टेशन में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराया है। गायब दस्तावेजों में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या और उसके बाद हुए कंधमाल हिंसा से संबंधित न्यायमूर्ति एएस नायडू आयोग की रिपोर्ट तथा एक अस्पताल के गंभीर अग्निकांड से संबंधित आरडीसी (राजस्व मंडल आयुक्त) जांच रिपोर्ट शामिल हैं। इन दोनों रिपोर्टों को अत्यंत संवेदनशील और सार्वजनिक महत्व का माना जाता है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह शिकायत गृह विभाग के संयुक्त सचिव शरत चंद्र मरांडी द्वारा दर्ज कराई गई है, जिसमें इन रिपोर्टों के गायब होने की विस्तृत आपराधिक जांच की मांग की गई है। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं, जिनमें धारा 305, 316(2), 238(सी), 241 और 61(2)(बी) शामिल हैं, के तहत मामला दर्ज किया है, जो इस प्रकरण की गंभीरता और संभावित आपराधिक कदाचार की ओर संकेत करता है।
गृह विभाग के संयुक्त सचिव शरत चंद्र मरांडी, ओडिशा सरकार ने औपचारिक रूप से इन दो महत्वपूर्ण न्यायिक जांच रिपोर्टों के गायब होने की आपराधिक जांच और प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है।
सरकार को प्रस्तुत करने के बाद सीएमओ भेजी गई रिपोर्ट
ये रिपोर्टें राज्य सरकार को प्रस्तुत किए जाने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई थीं। गृह विभाग द्वारा कैपिटल पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक को लिखे गए पत्र में बताया गया है कि दोनों जांच रिपोर्टें संबंधित आयोगों द्वारा प्रस्तुत किए जाने के बाद विधिवत प्राप्त हुई थीं और सरकारी विचारार्थ सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत आगे भेजी गई थीं।
मरांडी के अनुसार, पहली रिपोर्ट न्यायमूर्ति एएस नायडू आयोग की है, जो स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती तथा अन्य की जलेसपेटा आश्रम (कंधमाल जिला) में हत्या की जांच से संबंधित है। दूसरी रिपोर्ट आरडीसी की जांच रिपोर्ट है, जो भुवनेश्वर स्थित सम अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में हुए भीषण अग्निकांड से संबंधित है।
जानकारी के अनुसार, ये दोनों रिपोर्टें गृह विभाग द्वारा प्राप्त होने के बाद मुख्य सचिव कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई थीं। नायडू आयोग की रिपोर्ट 16 सितंबर 2016 को मुख्य सचिव कार्यालय को भेजी गई थी और 19 सितंबर 2016 को मुख्यमंत्री कार्यालय को अग्रेषित की गई। इसी प्रकार, अस्पताल अग्निकांड की आरडीसी रिपोर्ट 23 मई 2018 को मुख्य सचिव कार्यालय को भेजी गई थी और 24 मई 2018 को मुख्यमंत्री कार्यालय को अग्रेषित की गई।
दोनों रिपोर्टें अब मुख्यमंत्री कार्यालय में उपलब्ध नहीं
गृह विभाग को हाल ही में जानकारी मिली कि ये दोनों रिपोर्टें अब मुख्यमंत्री कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं और संबंधित अधिकारियों द्वारा खोजबीन के बावजूद उनका पता नहीं चल सका है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इसी अवधि में भेजी गई कई अन्य फाइलें और रिपोर्टें 4 जून 2024 को मुख्यमंत्री कार्यालय से वापस कर दी गई थीं, जिस दिन ओडिशा विधानसभा चुनावों की मतगणना हुई थी और सरकार परिवर्तन के संकेत स्पष्ट हो गए थे।
इनके ठिकाने को लेकर गंभीर आशंकाएं उत्पन्न
हालांकि, अन्य फाइलें वापस कर दी गईं, लेकिन ये दो न्यायिक जांच रिपोर्टें वापस नहीं आईं। इनके गायब होने से इनके ठिकाने को लेकर गंभीर आशंकाएं उत्पन्न हो गई हैं।
मरांडी ने कहा है कि इन परिस्थितियों से यह उचित संदेह उत्पन्न होता है कि इन रिपोर्टों को जानबूझकर हटाया गया, रोका गया, छिपाया गया, नष्ट किया गया या अवैध रूप से उनके साथ कोई अन्य कार्रवाई की गई हो सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये रिपोर्टें न्यायिक एवं अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों द्वारा तैयार महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख हैं, और इनके सरकारी अभिलेखागार से गायब होना गंभीर सार्वजनिक चिंता का विषय है।
शामिल हो सकते हैं संज्ञेय अपराध
शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों से यह उचित आधार बनता है कि इसमें बिना अनुमति सरकारी रिकॉर्ड को हटाने, आपराधिक विश्वासघात, छिपाने तथा सरकारी दस्तावेजों को नष्ट करने जैसे संज्ञेय अपराध शामिल हो सकते हैं।
संयुक्त सचिव ने तत्काल कार्रवाई की मांग
संयुक्त सचिव ने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए अनुरोध किया है कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच की जाए, यह पता लगाया जाए कि रिपोर्टें कैसे गायब हुईं, इसके लिए कौन जिम्मेदार है, और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।
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