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नेपाली पिता-पुत्र ने एक ही सीजन में दो बार एवरेस्ट पर साथ चढ़कर बनाया विश्व रिकॉर्ड

काठमांडू। नेपाल के एक पिता-पुत्र ने पर्वतारोहण के इतिहास में नया अध्याय जोड़ते हुए एक ही पर्वतारोहण सीजन के दौरान दो बार साथ मिलकर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट फतह करने का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है।
पिता-पुत्र की यह उपलब्धि किसी पूर्व नियोजित रिकॉर्ड प्रयास का हिस्सा नहीं थी। दोनों अपने पेशेवर दायित्वों के तहत अभियान मार्गदर्शक के रूप में काम कर रहे थे और इसी दौरान यह ऐतिहासिक कीर्तिमान बन गया। छाङ्वा और लाक्पा तासी शेर्पा ने 17 मई की सुबह 5:30 बजे चीनी पर्वतारोही क्यूलोंग पेंग को समुद्र तल से 8,848.86 मीटर ऊंची एवरेस्ट चोटी तक सफलतापूर्वक पहुंचाया। अभियान पूरा कर सुरक्षित लौटने के बाद उन्होंने अगले अभियान की तैयारी शुरू कर दी।
छह दिन से भी कम समय बाद 23 मई को सुबह 3:29 बजे दोनों पिता-पुत्र एक बार फिर एवरेस्ट के शिखर पर खड़े थे। इस बार वे भारत की प्रतिष्ठित एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो टीम के सदस्यों का नेतृत्व कर रहे थे। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने पर्वतारोहण इतिहास में एक अनोखा रिकॉर्ड बना दिया है। अनुभवी पर्वत मार्गदर्शक छाङ्वा शेर्पा और उनके पुत्र लाक्पा तासी शेर्पा यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के पहले पिता-पुत्र बने हैं। 2026 के पर्वतारोहण सीजन में इस जोड़ी ने मात्र 5 दिन, 21 घंटे और 59 मिनट के अंतराल में दो बार एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया।
छाङ्वा शेर्पा वर्ष 2017 से पेशेवर पर्वत मार्गदर्शक के रूप में कार्यरत हैं और नेपाल के सबसे सफल उच्च हिमालयी गाइडों में गिने जाते हैं। उनके पुत्र लाक्पा तासी बचपन से ही अभियान जीवन को करीब से देखते हुए बड़े हुए। उन्होंने अपने पिता को दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों की ओर जाते देखा और बाद में स्वयं भी इसी पेशे को अपनाने का फैसला किया।
लाक्पा तासी के लिए 2026 का सीज़न विशेष रूप से यादगार रहा। इससे पहले वह एवरेस्ट अभियानों में सहयोगी भूमिका निभा चुके थे, लेकिन इस वर्ष उन्होंने पहली बार एवरेस्ट की चोटी पर सफलतापूर्वक कदम रखा। वह भी अपने पिता के साथ। फिर एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार शिखर पर पहुंचकर उन्होंने इस अनुभव को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया।
इस सीज़न में दो सफल आरोहण के साथ छाङ्वा शेर्पा ने कुल दसवीं बार एवरेस्ट की चोटी फतह की है। उनका अनुभव केवल एवरेस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने कई अन्य ऊंची हिमालयी चोटियों पर भी सफल अभियान संचालित किए हैं। यह उपलब्धि न केवल नेपाल के पर्वतारोहण इतिहास में बल्कि विश्व पर्वतारोहण समुदाय में भी एक प्रेरणादायक और ऐतिहासिक मील का पत्थर मानी जा रही है।
साभार – हिस

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