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चार प्रख्यात शिक्षकों को वर्ष 2025 की साइरैंक ग्लोबल रजिस्ट्री में स्थान मिला
बालेश्वर। फकीर मोहन विश्वविद्यालय (एफएमयू) के लिए गौरव का क्षण तब आया, जब विश्वविद्यालय के चार प्रख्यात शिक्षकों को वर्ष 2025 की साइरैंक ग्लोबल रजिस्ट्री में विश्व के शीर्ष 5 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला। यह प्रतिष्ठित वैश्विक रैंकिंग शोध कार्यों की गुणवत्ता, प्रकाशनों, उद्धरण (साइटेशन) तथा अकादमिक प्रभाव के आधार पर तैयार की जाती है।
विश्व स्तर पर सम्मानित होने वाले एफएमयू के चार शिक्षकों में कंप्यूटर विज्ञान एवं मशीन लर्निंग विभाग के प्रो सच्चिदानंद देहुरी, भूगोल एवं जलवायु विज्ञान विभाग के प्रो मनोरंजन मिश्र, हाइड्रोमेटालर्जी एवं संसाधन पुनर्प्राप्ति विशेषज्ञ प्रो पंकज कुमार परही तथा आणविक जीवविज्ञान एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स के विशेषज्ञ डॉ मनोजीत भट्टाचार्य शामिल हैं।
प्रो सच्चिदानंद देहुरी ने पिछले 25 वर्षों में डेटा माइनिंग, मशीन लर्निंग तथा बहु-मापदंडीय निर्णय प्रणाली के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके 250 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं तथा उन्हें यंग साइंटिस्ट अवार्ड, बॉयस्कास्ट, डीएसटी और टेयर फेलोशिप जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
प्रो पंकज कुमार पाढ़ी, जो यूनाइटेड किंगडम की रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के फेलो (एफआरएससी) हैं, अपशिष्ट पुनर्चक्रण, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सतत धातु निष्कर्षण तकनीकों के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुके हैं। उनके 240 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं तथा उनके नाम छह पेटेंट भी दर्ज हैं। वे लगातार छह वर्षों से विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल रहे हैं।
प्रो मनोरंजन मिश्र जलवायु परिवर्तन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में अग्रणी शोधकर्ता हैं। बिजली गिरने की पूर्व चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन संबंधी उनके शोध कार्यों ने आपदा तैयारी और जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
डॉ मनोजीत भट्टाचार्य ने वैक्सीन डिजाइन, जीनोमिक्स और संक्रामक रोग अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उनके शोध कार्यों को 9,000 से अधिक उद्धरण प्राप्त हो चुके हैं तथा उनका एच-इंडेक्स 50 से अधिक है। वे नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स और पीएलओएस वन जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं के संपादकीय बोर्ड के सदस्य भी हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे एफएमयू की बढ़ती वैश्विक शोध प्रतिष्ठा का प्रमाण बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि विज्ञान, नवाचार और समाजोपयोगी अनुसंधान के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता को दर्शाती है। विश्वविद्यालय परिवार ने चारों विद्वानों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालय के साथ-साथ ओडिशा का भी नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
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