-
स्वास्थ्य मंत्री ने दो अस्पतालों में किया औचक निरीक्षण
-
भर्ती से तीन दिन पहले और डिस्चार्ज के 15 दिन बाद तक की सेवाएं रहेंगी पूरी तरह निःशुल्क
-
आयुष्मान भारत और गोपबंधु योजना के नियम तोड़ने वाले अस्पतालों पर होगी कार्रवाई
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) और गोपबंधु जन आरोग्य योजना (जीजेएवाई) के लाभार्थियों से अवैध शुल्क वसूली पर कड़ा रुख अपनाया है। इसी क्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ मुकेश महालिंग ने शनिवार को राजधानी भुवनेश्वर के दो निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर योजनाओं के तहत मरीजों को दी जा रही सुविधाओं का जायजा लिया।
यह कार्रवाई राज्य स्वास्थ्य आश्वासन सोसाइटी (एसएचएएस) द्वारा 1 जून 2026 को जारी परामर्श के बाद की गई है। सोसाइटी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ वृंदा डी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि योजना से संबद्ध अस्पताल लाभार्थियों से भर्ती से तीन दिन पहले तक की परामर्श, जांच और दवाओं के लिए तथा डिस्चार्ज के बाद 15 दिनों तक की चिकित्सा सेवाओं, दवाओं, जांच और फॉलो-अप विजिट के लिए कोई शुल्क नहीं ले सकते।
परामर्श में कहा गया है कि इन सभी सेवाओं का खर्च पहले से ही योजना के पैकेज में शामिल है। अस्पतालों को आवश्यक दवाएं स्वयं उपलब्ध करानी होंगी और लाभार्थियों को निःशुल्क प्रदान करनी होंगी। डिस्चार्ज के बाद 15 दिनों के भीतर आवश्यक जांच, चिकित्सकीय मूल्यांकन और फॉलो-अप सेवाएं भी मुफ्त उपलब्ध करानी होंगी।
सर्जरी के बाद जटिलताओं का खर्च भी अस्पताल वहन करेंगे
निर्देशों के अनुसार यदि किसी मरीज की सर्जरी होती है और उसके बाद कोई जटिलता उत्पन्न होती है या पुनः भर्ती की आवश्यकता पड़ती है, तो उसका खर्च भी मूल पैकेज के अंतर्गत ही शामिल माना जाएगा। राज्य स्वास्थ्य आश्वासन सोसाइटी ने चेतावनी दी है कि दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल प्रशासन से सीधे की पूछताछ
औचक निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ महालिंग ने अस्पताल प्रबंधन से नए दिशा-निर्देशों के पालन की स्थिति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अस्पतालों में स्थापित हेल्प डेस्क की कार्यप्रणाली की समीक्षा की और निर्देश दिया कि प्रत्येक मरीज के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए तथा उन्हें समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए।
बाद में लोक सेवा भवन में पंजीकृत चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में भी मंत्री ने हेल्प डेस्क को प्रभावी ढंग से संचालित करने और मरीज-केंद्रित सेवाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
मरीजों पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त आर्थिक बोझ
सरकार का कहना है कि एबी-पीएमजेएवाई और जीजेएवाई का उद्देश्य लोगों को नकदरहित और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, न कि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना। लाखों परिवार इन योजनाओं पर निर्भर हैं और सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि लाभार्थियों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले।
स्वास्थ्य विभाग ने लाभार्थियों से अपील की है कि यदि किसी अस्पताल द्वारा अनधिकृत शुल्क वसूला जाता है तो इसकी तत्काल शिकायत करें, ताकि दोषी संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
