-
कहा- पार्टी में किया गया व्यवस्थित रूप से अनदेखा
भुवनेश्वर। ओडिशा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत राज्यसभा सांसद देवाशीष सामंतराय ने सोमवार को बीजू जनता दल (बीजद) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में उन्हें पार्टी के भीतर “व्यवस्थित रूप से अनदेखा” किया गया और ऐसा महसूस कराया गया कि पार्टी को अब उनकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है।
बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक को संबोधित अपने इस्तीफा पत्र में सामंतराय ने उन्हें राज्यसभा भेजने तथा अविभाजित कटक जिले के लोगों की सेवा करने और राष्ट्रीय स्तर पर ओडिशा के मुद्दों को उठाने का अवसर देने के लिए आभार व्यक्त किया।
पत्र में उन्होंने लिखा कि मुझे राज्यसभा के लिए नामित करने के लिए मैं आपका सदैव ऋणी रहूंगा। आपने मुझे अविभाजित कटक जिले के लोगों की सेवा करने और राष्ट्रीय मंच पर ओडिशा के मुद्दों को उठाने का जो अवसर दिया, उसके लिए मैं अपनी हार्दिक और गहन कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।
सामंतराय ने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के हितों को सर्वोपरि रखा और वर्षों तक पूरी निष्ठा एवं प्रतिबद्धता के साथ संगठन के लिए कार्य किया। हालांकि, हाल के समय में उन्हें पार्टी के भीतर लगातार उपेक्षित और अपमानित महसूस कराया गया।
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि मैंने सदैव पार्टी के हित में कार्य किया है और पूरे विश्वास एवं समर्पण के साथ संगठन की सेवा की है। लेकिन मुझे महसूस हो रहा है कि हाल के दिनों में पार्टी में मेरा व्यवस्थित रूप से मेरी अनदेखी की गई और अपमान किया गया है तथा पार्टी को अब मेरी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है। इसलिए जनहित में मैंने यह कठिन निर्णय लिया है और मेरा इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध करता हूं।
पांडियन को जिम्मेदार ठहराया
राज्यसभा सांसद देवाशीष सामंतराय ने पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए बीजद के रणनीतिकार वीके पांडियन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि पांडियन के बढ़ते दबदबे की वजह से ही उन्होंने पार्टी छोड़ी है। सामंतराय ने आरोप लगाया कि पांडियन ने जान-बूझकर सालों तक उन्हें बीजद सुप्रीमो नवीन पटनायक से मिलने से रोका, जबकि उन्हें पता था कि सामंतराय का नेता के साथ कितना गहरा जुड़ाव है। उन्होंने पांडियन पर पार्टी संगठन को मजबूत करने के बजाय लोगों को निलंबित करने पर ज़्यादा ध्यान देने का आरोप लगाया।
ट्रस्ट बनाने पर उठाए सवाल
इस अनुभवी नेता ने आगे कहा कि पटनायक ने एक बार उनसे कहा था कि पांडियन उनके उत्तराधिकारी नहीं हैं, फिर भी बाद में उन्होंने एक ट्रस्ट के नाम पर बीजू पटनायक का आवास पांडियन को सौंप दिया। सामंतराय ने इसे बीजू पटनायक की विरासत का घोर अपमान बताया। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि वह बीजू पटनायक की संपत्ति का “बाहरी लोगों” को हस्तांतरण स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने इसे ओडिशा की राजनीतिक विरासत के साथ विश्वासघात करार दिया। उनकी इन टिप्पणियों ने पार्टी में पांडियन की भूमिका और उसके भविष्य की दिशा को लेकर चल रही बहस को और तेज़ कर दिया है।
बीजद के भीतर की उथल-पुथल और बढ़ी
सामंतराय के इस्तीफ़े से बीजद के भीतर की उथल-पुथल और बढ़ गई है, जहां वरिष्ठ नेताओं की ओर से असंतोष की आवाज़ें लगातार उठ रही हैं। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में उनके इन बयानों से पूरे ओडिशा में राजनीतिक चर्चाएं और तेज होंगी।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
