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जंगलों और पहाड़ों के बीच पर्यटकों को मिलेगा नया अनुभव
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देब्रीगढ़ से सिमिलिपाल तक बनेंगे विशेष कारवां पार्क
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इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
भुवनेश्वर। ओडिशा में पर्यटन को नया आयाम देने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब राज्य के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों पर पर्यटक “चलते-फिरते घर” यानी कारवां के जरिए प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकेंगे। वन विभाग जल्द ही ओडिशा के विभिन्न इको-टूरिज्म स्थलों पर कारवां पर्यटन सेवा शुरू करने जा रहा है। इसके लिए विशेष कारवां पार्क भी विकसित किए जाएंगे।
राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रकृति के करीब रहने का अनुभव देना है, जबकि पर्यावरणीय संतुलन को भी सुरक्षित रखा जाएगा।
इन पर्यटन स्थलों पर मिलेगी कारवां सुविधा
वन विभाग द्वारा जिन प्रमुख स्थलों पर कारवां पर्यटन शुरू किया जाएगा, उनमें देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व, सातकोसिया टाइगर रिजर्व, महेंद्रगिरि, चांदका-दामपड़ा वन्यजीव अभयारण्य, देओमाली पहाड़ियां, भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान शामिल हैं।
इन स्थानों पर पर्यटक जंगल, पहाड़, नदी और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित एवं नियंत्रित वातावरण में रात्रि विश्राम कर सकेंगे।
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना होगा संचालन
वन विभाग ने कारवां पर्यटन के संचालन के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसमें पार्किंग व्यवस्था, पर्यटकों के व्यवहार और वन क्षेत्रों में गतिविधियों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। वन्यजीव विभाग के उप वन संरक्षक विवेक कुमार के अनुसार, पूरी व्यवस्था इस तरह तैयार की गई है कि पर्यावरणीय संतुलन और वन्यजीवों की सुरक्षा प्रभावित न हो।
स्थायी निर्माण पर रहेगा प्रतिबंध
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कारवां पार्क केवल अस्थायी पार्किंग और सीमित अवधि के ठहराव के लिए होंगे। इन स्थानों पर किसी प्रकार का स्थायी निर्माण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा कारवां पार्कों को होटल, रिसॉर्ट या स्थायी आवासीय सुविधा के रूप में संचालित करने की अनुमति नहीं होगी।
एक समय में सीमित संख्या में ही कारवां
जारी एसओपी के अनुसार, किसी भी स्थल पर एक समय में केवल चार से पांच कारवां को ही अनुमति दी जाएगी। यह संख्या संबंधित क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता, जल उपलब्धता, कचरा प्रबंधन क्षमता और वन्यजीवों की आवाजाही को ध्यान में रखकर तय की जाएगी। डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) को आवश्यकता अनुसार अलग-अलग स्थलों के लिए विशेष सीमा तय करने का अधिकार भी दिया गया है।
ऑनलाइन होगी बुकिंग, केवल पंजीकृत वाहनों को मिलेगी अनुमति
कारवां पार्किंग और उससे जुड़ी सेवाओं की बुकिंग इको टूर ओडिशा पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। वन विभाग ने साफ किया है कि केवल सरकार द्वारा अनुमोदित ऑपरेटरों और पहले से पंजीकृत कारवां वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति मिलेगी। इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग सुविधा पोर्टल में शामिल कर दी गई है।
ओडिशा पर्यटन को मिलेगा नया आकर्षण
विशेषज्ञों का मानना है कि कारवां पर्यटन शुरू होने से ओडिशा के इको-टूरिज्म को नई पहचान मिलेगी। इससे साहसिक पर्यटन, पारिवारिक भ्रमण और प्रकृति प्रेमियों के लिए राज्य एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
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