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ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोध आधारित पुस्तकों और पत्रिकाओं का प्रकाशन

  •           मिलेट्स, संस्कृति, साहित्य, जैव विविधता और कृषि जैसे विषयों पर प्रकाशित हुईं कई महत्वपूर्ण पुस्तकें

भुवनेश्वर। ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय इन दिनों अकादमिक और शोध प्रकाशनों के क्षेत्र में उल्लेखनीय सक्रियता दिखा रहा है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और संकाय सदस्यों द्वारा शोध आधारित पुस्तकों और अकादमिक पत्रिकाओं का लगातार प्रकाशन किया जा रहा है। शैक्षणिक सत्र के समापन के साथ कई नई पुस्तकें और जर्नल जारी किए गए हैं, जिन्हें शोध और ज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।

हाल ही में जारी की गई नवीनतम पुस्तक एक ई-बुक है, जिसका शीर्षक है ‘एन इंट्रोडक्शन टू सोशियो इकोनॉमिक एंड कल्चरल एस्पेक्ट्स ऑफ मिलेट्स फॉर विजन विकसित भारत एट 2047’। इसे अर्थशास्त्र विभाग द्वारा प्रकाशित किया गया है और इसके लेखक अर्थशास्त्र विभाग की डॉ मिनाती साहू तथा पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के डॉ सौरव गुप्ता हैं। यह पुस्तक वीवीबी एट 2047 पर आधारित आईसीएसएसआर के एक विशेष शोध परियोजना का पृष्ठभूमि अध्ययन प्रस्तुत करती है, जिसमें डॉ साहू और डॉ गुप्ता क्रमशः परियोजना निदेशक और सह-परियोजना निदेशक थे।

संस्कृत विभाग ने ‘अमृतविद्या’ नामक एक पुस्तक प्रकाशित की है। यह उन चुनिंदा शोध पत्रों का संग्रह है, जिन्हें “प्राचीन भारतीय साहित्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी” विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत किया गया था। प्रो एनसी पांडा (डीन, भाषा संकाय और विभागाध्यक्ष, संस्कृत) इसके प्रधान संपादक हैं, जबकि डॉ देवाशीष कर्मकार (सहायक प्रोफेसर) इसके संपादक हैं। संस्कृत विभाग के सहायक प्रोफेसर एवं समन्वयक डॉ नवीन कुमार प्रधान और सहायक प्रोफेसर डॉ संजीव सरकार इस पुस्तक के संयुक्त संपादक हैं। इस पुस्तक में प्रो कृष्णमोहन पांडेय, प्रो किशोर चंद्र पाढ़ी और प्रो सुभाष चंद्र दास जैसे प्रख्यात लेखकों के मूल्यवान लेख शामिल हैं।

ओड़िया विभाग ने ‘कवि विद्युतप्रभा देबिंका कविता: नवमूल्यांकन’ नामक पुस्तक प्रकाशित की है। इस पुस्तक का संपादन ओड़िया विभाग के सहायक प्रोफेसर एवं प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ प्रदोश कुमार स्वाइन ने किया है। विभाग के संकाय सदस्य डॉ आलोक बराल, डॉ गणेश प्रसाद साहू और डॉ रघुनाथ ओझा ने भी सहायक संपादक के रूप में इसमें अपना योगदान दिया है। जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण विभाग ने ‘जैव विविधता और कृषि: एक सतत भविष्य के लिए’  नामक पुस्तक प्रकाशित की है। इस पुस्तक का संपादन डॉ देवव्रत पंडा (सहायक प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, डीबीसीएनआर), प्रो एसके पालिता (सेवानिवृत्त संकाय) और डॉ काकोली बनर्जी (सहायक प्रोफेसर, डीबीसीएनआर) ने किया है। वानिकी विभाग ने ‘ऑयस्टर मशरूम की खेती: कोरापुट के ऊंचे इलाकों के लिए एक सतत कृषि-वानिकी अवसर’  नामक पुस्तक प्रकाशित की है। इस पुस्तक का संपादन डॉ. सुभास्मिता परिदा, डॉ. रामेंद्र परही और ज्योतिरादित्य दास ने किया है। इन पुस्तकों के अलावा, दो अकादमिक पत्रिकाएं भी प्रकाशित की गई हैं-संस्कृत विभाग द्वारा ‘अरण्य प्रज्ञान’ और ओड़िया विभाग द्वारा ‘शबरी’ । विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो एनसी पंडा ने इन पुस्तकों और पत्रिकाओं का विमोचन करते हुए संबंधित विभागों और लेखकों को बधाई दी।

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