-
मुख्यमंत्री कार्यालय तुरंत हरकत में आया
-
कांटाबांजी विधायक लक्ष्मण बाग ने क्षेत्र की उपेक्षा और साजिश का लगाया आरोप
-
विकास कार्यों में बाधा डालने और स्वीकृत योजनाओं की राशि लौटाने का दावा
भुवनेश्वर। ओडिशा की सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक लक्ष्मण बाग द्वारा मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को लिखे गए तीखे पत्र ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। अपने ही सरकार पर क्षेत्र की अनदेखी, विकास कार्यों में बाधा और कथित प्रशासनिक-राजनीतिक साजिश के गंभीर आरोप लगाने वाले इस पत्र को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पत्र सामने आते ही मुख्यमंत्री कार्यालय तत्काल सक्रिय हो गया और संबंधित विभागों से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई। वहीं, पश्चिमी ओडिशा में सत्तारूढ़ दल के भीतर असंतोष और आंतरिक खींचतान को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
विधायक लक्ष्मण बाग ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर अपने सूखाग्रस्त कांटाबांजी क्षेत्र की अनदेखी और विकास कार्यों में कथित साजिश का गंभीर आरोप लगाया है।
करीब 18 महीने पहले ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री तथा बीजद मुखिया नवीन पटनायक को हराकर निर्वाचित हुए विधायक बाग ने पत्र में कहा कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद वे स्वयं को बेबस महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंचाई, चेक डैम, सड़क, पुल, पेयजल और शहरी विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सरकार को भेजे गए, लेकिन अधिकांश प्रस्तावों को या तो नजरअंदाज कर दिया गया या लंबित रख दिया गया।
ईओएएन योजना में धन वापसी को बताया साजिश
विधायक ने पत्र में दावा किया कि तुरेकेला ब्लॉक के कई गांवों में ईओएएन योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं के लिए राशि जारी होने के बावजूद उसे कथित प्रशासनिक और राजनीतिक साजिश के तहत वापस कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि विकास कार्य रुकने से गांव स्तर पर लोगों में भारी नाराजगी बढ़ रही है और जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है।
अधिकारियों के तबादले और रिक्त पदों पर भी उठाए सवाल
लक्ष्मण बाग ने आरोप लगाया कि जिला स्तर से लेकर राज्य सचिवालय तक उनकी सिफारिशों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने सक्षम अधिकारियों के अचानक तबादले पर भी सवाल उठाया और कहा कि उनसे बिना परामर्श किए स्थानांतरण किए जा रहे हैं। उन्होंने कांटाबांजी एनएसी में कार्यपालक अधिकारी का पद लंबे समय से रिक्त रहने पर भी चिंता जताई।
जनप्रतिनिधियों की गरिमा खत्म हो जाएगी
पत्र में विधायक ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों को जनता की सेवा करते समय इस तरह की मनमानी और साजिशों का सामना करना पड़े, तो लोकतंत्र, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की गरिमा का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की गंभीर जांच कर छिपी ताकतों को उजागर करने और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
मुख्यमंत्री कार्यालय ने विधायक के पत्र को कार्य विभाग, जल संसाधन विभाग, पंचायतीराज एवं पेयजल विभाग तथा आवास एवं शहरी विकास विभाग को भेजते हुए तत्काल कार्रवाई और एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।
इसके बाद जल संसाधन विभाग के अवर सचिव प्रदीप कुमार बेहरा ने अभियंता प्रमुख को तत्काल आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चाएं
इस घटनाक्रम के बाद पश्चिमी ओडिशा में विकास कार्यों के असमान वितरण और सत्तारूढ़ दल के भीतर बढ़ती नाराजगी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
Indo Asian Times A Hindi Digital News Portal
