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इस्कॉन के आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं और सेवायतों में नाराजगी
भुवनेश्वर। विदेशों में निर्धारित तिथि से पहले भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा और रथयात्रा आयोजित किए जाने को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। श्रद्धालुओं, शोधकर्ताओं, सेवायतों और परंपरा से जुड़े लोगों ने इस्कॉन पर परंपराओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम के वाटफोर्ड स्थित इस्कॉन भक्तिवेदांत मैनर में 10 मई को स्नान यात्रा आयोजित की गई, जबकि दक्षिण अफ्रीका के डरबन में 2 मई को रथयात्रा निकाली गई। इसे लेकर ओडिशा समेत विभिन्न स्थानों के भगवान जगन्नाथ भक्तों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
जगन्नाथ परंपरा में तिथियों का विशेष महत्व
श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े सभी अनुष्ठान निर्धारित धार्मिक पंचांग और परंपरागत तिथियों के अनुसार ही होते हैं। वर्ष 2026 में स्नान यात्रा 29 जून और रथयात्रा 16 जुलाई को निर्धारित है, जिसे श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन द्वारा तय किया गया है।
इसके बावजूद विदेशों में समय से पहले इन आयोजनों के किए जाने से विवाद और गहरा गया है। आलोचकों का आरोप है कि इस्कॉन ने परंपरागत रीति-रिवाजों और धार्मिक मर्यादाओं की अनदेखी की है।
रथ निर्माण और परंपराओं पर भी उठे सवाल
श्रद्धालुओं और सेवायतों ने रथ निर्माण की शैली और सजावट पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया गया है कि पारंपरिक नियमों से हटकर रथों के निर्माण और उनके आवरण में अलग रंग के कपड़ों का उपयोग किया गया। इसे सदियों पुरानी जगन्नाथ संस्कृति और परंपराओं से विचलन बताया जा रहा है।
गजपति महाराजा पहले भी जता चुके हैं नाराजगी
पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव पहले भी इस्कॉन द्वारा समय से पहले रथ यात्रा और स्नान यात्रा आयोजित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जता चुके हैं।
उन्होंने पूर्व में इस्कॉन को चेतावनी देते हुए कहा था कि निर्धारित तिथियों से पहले ऐसे आयोजन परंपरा के विरुद्ध हैं और यदि यह जारी रहा तो कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
2026 में दुनिया के 80 स्थानों पर रथ यात्रा की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, इस्कॉन ने वर्ष 2026 में दुनिया के लगभग 80 स्थानों पर रथ यात्रा और 10 स्थानों पर स्नान यात्रा आयोजित करने की योजना बनाई है। अमेरिका के फ्लोरिडा और टेक्सास, यूनाइटेड किंगडम के लंदन, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिस्बेन और कनाडा समेत कई देशों में कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
परंपरा की पवित्रता बनाए रखने की अपील
भगवान जगन्नाथ के श्रद्धालुओं ने इस्कॉन नेतृत्व से आग्रह किया है कि भविष्य में 12वीं शताब्दी के इस पवित्र धाम से जुड़ी परंपराओं और पुरी की निर्धारित धार्मिक तिथियों का सम्मान किया जाए, ताकि जगन्नाथ संस्कृति की पवित्रता और मर्यादा बनी रहे।
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