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आवास, ड्रेनेज, स्मार्ट सिटी और पारदर्शी प्रशासन पर सरकार का बड़ा फोकस
भुवनेश्वर। कृष्ण चंद्र महापात्र ने गुरुवार को ओडिशा अर्बन एकेडमी में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में “विकसित ओडिशा एट 2036” के विजन को साकार करने के लिए शहरी विकास की महत्वाकांक्षी और समयबद्ध कार्ययोजना पेश की। बैठक में आवास एवं शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी, नगर प्रशासन निदेशक अरिंदम डाकुआ सहित विभिन्न शहरी परियोजनाओं के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक की शुरुआत में मंत्री ने कहा कि विभाग की वास्तविक सफलता केवल आधारभूत ढांचा तैयार करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि शहरी नागरिकों के जीवन स्तर, रोजगार और आर्थिक मजबूती में वास्तविक सुधार दिखना चाहिए। उन्होंने बताया कि विभाग को आवंटित लगभग 98 प्रतिशत बजट का उपयोग हो चुका है और अब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इसका लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचे।
2036 तक 80 प्रतिशत शहरी आबादी को आवास देने का लक्ष्य
बैठक में “ए रूफ फॉर ऑल” योजना की घोषणा प्रमुख आकर्षण रही। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत वर्ष 2036 तक शहरी आबादी के 80 प्रतिशत लोगों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना को तीन स्तरीय मॉडल के तहत लागू किया जाएगा, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग तथा प्रवासी और अस्थायी आबादी के लिए विशेष किराये के आवास मॉडल शामिल होंगे। इस योजना की शुरुआत पहले राउरकेला में की जाएगी और बाद में इसे अन्य शहरों तक विस्तारित किया जाएगा।
मंत्री ने जिला कलेक्टरों को प्राथमिकता के आधार पर उपयुक्त जमीन चिन्हित कर शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि परियोजनाओं का कार्य बिना देरी शुरू हो सके।
टाउन प्लानिंग योजना से होगा वैज्ञानिक शहरी विस्तार
मंत्री ने टाउन प्लानिंग स्कीम की भी समीक्षा की, जिसमें भूमि पूलिंग मॉडल के जरिए सुनियोजित शहरी विकास पर जोर दिया गया है। इस मॉडल के तहत 40 प्रतिशत भूमि सड़क, ड्रेनेज और अन्य नागरिक सुविधाओं जैसी सार्वजनिक आधारभूत संरचनाओं के लिए आरक्षित की जाएगी, जबकि विकसित की गई 60 प्रतिशत भूमि मूल भू-स्वामियों को वापस दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इससे सुनियोजित शहरी विस्तार, कम विवाद और बेहतर नागरिक सुविधाओं वाले क्षेत्रों का विकास संभव होगा।
पहले चरण में 49 शहर स्मार्ट सिटी योजना में शामिल
मुख्यमंत्री स्मार्ट सिटी योजना के तहत पहले चरण में 49 शहरों को विकास के लिए चिह्नित किया गया है। मंत्री ने अधिकारियों को आधुनिक सड़क नेटवर्क, बेहतर पेयजल आपूर्ति, सीवरेज एवं ड्रेनेज व्यवस्था और शहरी सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन शहरों को वैश्विक मानकों और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास के मॉडल के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही अमृत योजना के तहत प्रत्येक शहरी परिवार तक पेयजल पहुंचाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
शहरी बाढ़ रोकने के लिए बनेगा व्यापक ड्रेनेज मास्टर प्लान
बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि शहरी जलभराव और वर्षा जल प्रबंधन की समस्या के स्थायी समाधान के लिए व्यापक ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है और प्राथमिक परियोजनाओं के लिए आवश्यक धनराशि भी आवंटित कर दी गई है। विशेष रूप से गांगुआ नाला और दया पश्चिम कैनाल के पुनर्जीवन का कार्य प्राथमिकता पर शुरू किया जाएगा।
यह कार्य आवास एवं शहरी विकास विभाग और जल संसाधन विभाग के समन्वय से किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि शहरी बाढ़ प्रबंधन प्रधानमंत्री के मजबूत और टिकाऊ शहरी ढांचे के विजन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
नदियों और नालों का होगा पुनर्जीवन, बढ़ेगा पर्यटन
सरकार ने शहरी नदियों और नहरों के पुनर्जीवन की योजना पर भी जोर दिया है। इन्हें सार्वजनिक स्थल और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे शहरी जीवन स्तर बेहतर होने के साथ स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम होगा लागू
इसके अलावा शहरों में सीसीटीवी निगरानी और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू कर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था मजबूत करने की योजना बनाई गई है। मंत्री ने नवगठित 28 शहरी स्थानीय निकायों को जल्द पूरी तरह कार्यशील बनाने के निर्देश भी दिए।
सात दिन में मंजूरी नहीं तो अधिकारियों के वेतन से कटेगा जुर्माना
प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मंत्री ने “सुयोग” प्रणाली के तहत सभी अनुमोदनों को अधिकतम सात दिनों के भीतर पूरा करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि तय समय सीमा से अधिक देरी होने पर संबंधित अधिकारियों के वेतन से सीधे जुर्माना काटा जाएगा। यह कदम नौकरशाही देरी खत्म करने, पारदर्शिता बढ़ाने और राज्य में कारोबार सुगमता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सामुदायिक सुविधाओं के विकास पर भी जोर
मंत्री ने अधिकारियों को बाजार परिसर, सामुदायिक भवन तथा शवदाह एवं कब्रिस्तान सुविधाओं के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहरी विकास समावेशी और मानवीय होना चाहिए, जिससे समाज के सभी वर्गों को सम्मान और आवश्यक सुविधाएं मिल सकें। बैठक के अंत में मंत्री ने सभी अधिकारियों से नवाचार, जवाबदेही और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार विकसित, टिकाऊ, आधुनिक और नागरिक केंद्रित शहरों के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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