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भुवनेश्वर में ‘प्रज्ञा प्रेरणा’ कार्यशाला का शुभारंभ
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स्वायत्तता, नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से ओडिशा के शैक्षणिक संस्थान देश के लिए आदर्श मॉडल बनें : धर्मेन्द्र प्रधान
भुवनेश्वर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “प्रज्ञा प्रेरणा” में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने ओडिशा के शैक्षणिक संस्थानों से स्वायत्तता, नवाचार और अनुसंधान को अपनाकर देश के लिए आदर्श मॉडल बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का आयोजन ओडिशा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद और प्राध्यापक उपस्थित रहे।
विचार निर्माण और नवाचार को प्राथमिकता दें
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने ओडिशा को “ज्ञान की भूमि” बताते हुए कहा कि राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत शिक्षा के क्षेत्र में इसकी समृद्ध परंपरा को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रहकर विचार निर्माण और नवाचार को प्राथमिकता देनी चाहिए।
स्थानीय जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने पर जोर
धर्मेन्द्र प्रधान ने स्थानीय जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि ओडिशा की समुद्री तटरेखा, खनिज संपदा और सांस्कृतिक धरोहर को ध्यान में रखते हुए शिक्षा प्रणाली को तैयार किया जाना चाहिए। साथ ही, स्थानीय इतिहास, परंपराओं और महान व्यक्तित्वों के योगदान को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता बताई।
दूरदराज क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने पर भी बल दिया
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ और ‘अपार आईडी’ जैसी व्यवस्थाएं छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा की ओर प्रेरित करेंगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे ऑनलाइन शिक्षा माध्यमों के जरिए दूरदराज क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने पर भी बल दिया गया।
ज्ञान-आधारित समाज के रूप में उभर रहा भारत
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत ज्ञान-आधारित समाज के रूप में उभर रहा है और ओडिशा की युवा आबादी राज्य के विकास की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएं।
मोदी के नेतृत्व का उल्लेख किया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने मातृभाषा आधारित शिक्षा और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। इस अवसर पर छात्रों के व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए ‘इंटर्नशिप और कम्युनिटी सर्विस गाइडलाइंस’ पुस्तिका का विमोचन किया गया। कार्यशाला को शिक्षा क्षेत्र में सुधार और नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो ‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी।
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