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वैश्विक कल्याण का मार्ग दिखा सकता है हिन्दुत्व का विचार : सुरेश सोनी

  •     कहा-विदेशी आक्रमणों के कारण समाज में कुछ विकृतियां हुईं उत्पन्न

भुवनेश्वर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी ने कहा कि भारत के सनातन जीवन मूल्यों पर आधारित हिन्दुत्व का विचार न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। वे आरएसएस भुवनेश्वर महानगर द्वारा आयोजित एक विशिष्ट नागरिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

सुरेश सोनी ने भारत के प्राचीन गौरव का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को कभी “विश्वगुरु” और “सोने की चिड़िया” कहा जाता था, लेकिन लंबे विदेशी आक्रमणों के कारण समाज में कुछ विकृतियां उत्पन्न हुईं। उन्होंने सिंध क्षेत्र पर प्रारंभिक आक्रमणों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय अन्य क्षेत्रों में अपेक्षित जागरूकता नहीं थी, जिसके कारण आक्रमणों का प्रभाव बढ़ा।

उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों का उल्लेख किया। इसमें सशस्त्र क्रांति, गांधीवादी आंदोलन जैसे चरखा और सूत कातने के माध्यम से जनजागरण, तथा रास बिहारी बोस और नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा सैन्य संगठन के प्रयास शामिल थे। साथ ही उन्होंने सामाजिक सुधार आंदोलनों और स्वामी विवेकानंद के विचारों को भी महत्वपूर्ण बताया, जिनमें सामाजिक एकता, व्यक्तित्व निर्माण और भारत माता की आराधना पर बल दिया गया था।

आरएसएस के संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हेडगेवार ने भारत की पराधीनता के मूल कारणों पर चिंतन किया और निष्कर्ष निकाला कि समाज को उसके सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर संगठित करना आवश्यक है। उन्होंने 1925 में शाखा पद्धति की शुरुआत की, जो आज सौ वर्ष पूरे कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि आरएसएस से जुड़े विभिन्न संगठन शिक्षा, श्रम, स्वदेशी, सेवा और जनजातीय क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। इनमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विद्या भारती, भारतीय मजदूर संघ, स्वदेशी जागरण मंच, सेवा भारती, भारत विकास परिषद और वनवासी कल्याण आश्रम शामिल हैं।

सभी भाषाओं का सार एक

भाषा विवादों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सभी भाषाओं का सार एक ही है और संतों-कवियों की परंपरा में समान आध्यात्मिक संदेश निहित है। उन्होंने यह भी कहा कि ईश्वर के स्वरूप को लेकर विवादों ने विश्व में संघर्ष को जन्म दिया है, जबकि भारतीय दर्शन सभी में एक ही परम तत्व को स्वीकार करता है और विभिन्न मार्गों को एक ही लक्ष्य की ओर ले जाने वाला मानता है।

“पंच परिवर्तन” की अवधारणा पर फोकस

उन्होंने “पंच परिवर्तन” की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक जागरूकता, सामाजिक समरसता, आत्म-जागरूकता और नागरिक कर्तव्यबोध शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये पांच परिवर्तन समाज को अधिक सशक्त, अनुशासित और प्रगतिशील बना सकते हैं। कार्यक्रम में ओडिशा (पूर्व) प्रांत के संघचालक समीर महंती और भुवनेश्वर महानगर संघचालक श्रीनिवास मानसिंह मंच पर उपस्थित थे। इस संगोष्ठी में 500 से अधिक प्रबुद्धजन शामिल हुए।

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