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राज्यपाल की मंजूरी के बाद नई व्यवस्था शुरू
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विश्वविद्यालयों में एसटी, एससी और एसईबीसी को मिलेगा प्रतिनिधित्व
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नियुक्तियों में आएगी तेजी
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कानून उच्च शिक्षा में समावेशिता को मजबूत करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम – सूर्यवंशी सूरज
भुवनेश्वर। ओडिशा में उच्च शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने ओडिशा राज्य विश्वविद्यालय (शिक्षक संवर्ग में आरक्षण) अधिनियम, 2026 को लागू कर दिया है। यह कानून विधानसभा से पारित होने के बाद राज्यपाल डॉ हरिबाबू कंभमपाटी की मंजूरी मिलने के साथ ही प्रभाव में आ गया है।
इस नए कानून के तहत राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षक पदों पर अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) को उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने बताया कि यह कानून उच्च शिक्षा में समावेशिता को मजबूत करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। नई व्यवस्था के अनुसार अब प्रत्येक विश्वविद्यालय को एक इकाई मानकर शिक्षक पदों पर आरक्षण लागू किया जाएगा।
इसके तहत विभागवार आरक्षण प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है, जिससे प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर सीधे आरक्षण का लाभ मिलेगा।
लंबे समय से खाली पदों पर होगी भर्ती
मंत्री ने कहा कि इस कानून से लंबे समय से खाली पड़े शिक्षक पदों को भरने में तेजी आएगी। उन्होंने राज्यपाल को इस विधेयक को मंजूरी देने के लिए धन्यवाद भी दिया। साथ ही उन्होंने बताया कि राज्य के 14 विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है, जिससे शैक्षणिक नेतृत्व को मजबूती मिली है।
गुणवत्तापूर्ण और शोध आधारित शिक्षा पर जोर
सरकार का मानना है कि यह नया कानून, ओडिशा विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम 2024 के साथ मिलकर उच्च शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, व्यावहारिक और शोध आधारित बनाएगा। इस पहल के माध्यम से सरकार का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरा जाए, शैक्षणिक ढांचे को मजबूत किया जाए और वंचित वर्गों के लिए अवसरों का विस्तार किया जाए।
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