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क्रेडाई ओडिशा ने सरकार से की अपील
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जटिल व्यवस्था से परियोजनाओं में देरी और लागत में वृद्धि
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आसान और स्वचालित प्रणाली लागू करने पर जोर
भुवनेश्वर। क्रेडाई ओडिशा ने ओडिशा सरकार से भूमि रूपांतरण (लैंड कन्वर्जन) की मौजूदा प्रणाली में तत्काल सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि दशकों पुरानी जटिल प्रक्रिया के कारण परियोजनाओं में देरी, लागत में वृद्धि और शहरी विकास की गति प्रभावित हो रही है।
क्रेडाई ओडिशा के अध्यक्ष व क्रेडाई नेशनल के उपाध्यक्ष स्वदेश कुमार राउतराय ने बताया कि महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में भूमि रूपांतरण की प्रक्रिया को सरल और स्वचालित बना दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इन राज्यों में भवन योजना स्वीकृति के दौरान ही भूमि रूपांतरण स्वतः हो जाता है, जबकि ओडिशा में डेवलपर्स को अलग-अलग विभागों से कई स्तर की अनुमतियां लेनी पड़ती हैं।
बहु-स्तरीय अनुमतियों से बढ़ रही परेशानी
स्वदेश ने कहा कि ओडिशा में मौजूदा प्रणाली कई विभागों की मंजूरी, लंबी जांच प्रक्रिया और नियमों की अलग-अलग व्याख्या पर निर्भर है। यह न केवल परियोजनाओं में देरी करता है, बल्कि भूमि रिकॉर्ड और नियामकीय अनुपालन में अनिश्चितता भी बढ़ाता है।
प्रमुख चुनौतियां क्या हैं?
क्रेडाई ओडिशा ने कुछ मुख्य समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें पुराने भूमि रिकॉर्ड और बार-बार बदलते नियम, लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में रूपांतरण की जटिल प्रक्रिया, बैंक फाइनेंसिंग और संपत्ति लेन-देन में बाधाएं शामिल हैं।
आसान व्यवस्था से बढ़ेगा निवेश
उन्होंने सुझाव दिया कि भूमि रूपांतरण प्रक्रिया को भवन योजना स्वीकृति प्रणाली के साथ जोड़ा जाए, ताकि कारोबार में आसानी बढ़े और शहरी विकास को गति मिले। राउतराय ने कहा कि प्रक्रिया को सरल बनाने से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, परियोजनाओं की समयसीमा घटेगी और ओडिशा में टिकाऊ शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार के साथ मिलकर सुधार के लिए तैयार
क्रेडाई ओडिशा ने स्पष्ट किया कि वह सरकार के साथ मिलकर ऐसे सुधार लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों और राज्य के रीयल एस्टेट क्षेत्र के विकास को नई दिशा दें।
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