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बीजू-नवीन इंस्पिरेशनल फाउंडेशन को लेकर उठे सवाल
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संतृप्त मिश्र और वीके पांडियन के नाम आने से बढ़ी हलचल
भुवनेश्वर। राज्यसभा चुनाव से पहले बीजू जनता दल (बीजद) के भीतर एक नया विवाद सामने आया है। पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार संतृप्त मिश्र से जुड़े कुछ दस्तावेज सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों और पार्टी के अंदर चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार नई दिल्ली में ‘बीजू-नवीन इंस्पिरेशनल फाउंडेशन’ नामक एक संगठन का गठन किया गया है। दस्तावेजों के मुताबिक इस फाउंडेशन में पूर्व नौकरशाह वीके पांडियन को अध्यक्ष और बीजद के राज्यसभा उम्मीदवार संतृप्त मिश्र को सचिव के रूप में शामिल किया गया है।
प्रभात बिस्वाल ने स्पष्टता की मांग की
इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर कई सवाल उठने लगे हैं। बीजद के वरिष्ठ नेता प्रभात बिस्वाल ने फाउंडेशन के गठन को लेकर स्पष्टता की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी नेताओं और सदस्यों की जानकारी के बिना नई दिल्ली में इस प्रकार का संगठन क्यों बनाया गया। गौरतलब है कि प्रभात बिस्वाल पहले भी संतृप्त मिश्र को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाए जाने पर आपत्ति जता चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार इस मुद्दे को लेकर उनकी बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक के साथ बहस भी हो चुकी है।
पूर्व नेता श्रीमयी मिश्र ने भी गंभीर आरोप लगाए
इधर बीजद की पूर्व नेता श्रीमयी मिश्र ने भी इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर कहा कि ‘बीजू-नवीन इंस्पिरेशनल फाउंडेशन’ के गठन के जरिए बीजद की करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करने की साजिश रची जा रही है।
पार्टी की संपत्तियों को स्थानांतरित करने पर उठाए सवाल
उन्होंने दावा किया कि इस फाउंडेशन का गठन कथित तौर पर कई पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की जानकारी के बिना किया गया है। श्रीमयी मिश्र ने सवाल उठाया कि पार्टी की संपत्तियों को इस नई संस्था में स्थानांतरित करने के पीछे क्या उद्देश्य है।
संपत्तियों के स्वामित्व को नियंत्रित करने की योजना
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या फाउंडेशन के गठन और ट्रस्टी नियुक्ति की प्रक्रिया की जानकारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दी गई थी। उनके अनुसार इस संबंध में एक “गुप्त ब्लूप्रिंट” तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से संपत्तियों के स्वामित्व को नियंत्रित करने की योजना बनाई गई है।
हालांकि इस पूरे विवाद को लेकर वीके पांडियन और संतृप्त मिश्र की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस घटनाक्रम ने राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले बीजद के भीतर राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।
संतृप्त मिश्र की उम्मीदवारी पर भाजपा ने उठाए सवाल
इधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया है कि उन्होंने चुनावी हलफनामे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई है। भाजपा के प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने रविवार को दावा किया कि संतृप्त मिश्र ने राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल हलफनामे में ‘बीजू-नवीन इंस्पिरेशनल फाउंडेशन’ से जुड़ी जानकारी का खुलासा नहीं किया। उनके अनुसार मिश्र इस ट्रस्ट के सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं। यदि यह जानकारी जानबूझकर हलफनामे में नहीं दी गई है, तो इससे संतृप्त मिश्र की राज्यसभा उम्मीदवारी कानूनी विवाद में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार के लिए चुनाव आयोग को दिए जाने वाले हलफनामे में अपने बैंक खातों, संपत्तियों, आपराधिक मामलों तथा किसी गैर-सरकारी संगठन या ट्रस्ट से जुड़े होने की जानकारी देना अनिवार्य होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि संतृप्त मिश्र ने वास्तव में यह जानकारी छिपाई है, तो उनके नामांकन पर कानूनी चुनौती दी जा सकती है। यहां तक कि चुने जाने के बाद भी उनकी सदस्यता को चुनौती दी जा सकती है। भाजपा नेता ने बीजद उम्मीदवार से इस मामले में जल्द स्पष्टीकरण देने की मांग की है, ताकि उठे सवालों का जवाब मिल सके।
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