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ग्रामीणों के साथ-साथ बड़े बेटे ने भी अंतिम संस्कार में जाने से किया इंकार
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नवरंगपुर में जातिगत भेदभाव की शर्मनाक और चौंकाने वाली घटना
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छोटे बेटे, बेटियों और भांजे ने पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक पहुंचाया
नवरंगपुर। जिले के टेंटुलीखुंटी प्रखंड के कोंगरा गांव में जातिगत भेदभाव की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। गांव के लोगों ने दुर्जन माझी के पार्थिव शरीर को श्मशान तक ले जाने से केवल इसलिए इंकार कर दिया, क्योंकि उनकी बेटियों ने अपनी जाति से बाहर विवाह किया था। हद तो तब हो गई, जब बड़े बेटे ने भी पिता की अर्थी को कंधा देने से मना कर दिया।
इस पिता का नाम दुर्जन माझी है, जिसका सोमवार रात निधन हो गया। बताया जाता है कि उनके परिवार में दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं।
जब दुर्जन की मौत की खबर ग्रामीणों को मिली तो उन्होंने अंतिम संस्कार में सहयोग देने से साफ मना कर दिया और इसका कारण बेटियों के अंतरजातीय विवाह को बताया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब बड़े पुत्र ने भी कथित रूप से जातिगत बंदिशों का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार में भाग लेने से इंकार कर दिया।
समुदाय से कोई सहायता न मिलने पर छोटे पुत्र शिवा माझी, छोटी पुत्री स्वप्ना माझी, मृतक की बहन और भांजे ने मिलकर पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक पहुंचाया। परिवार ने अकेले ही अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी कीं, जबकि आसपास के लोग मूकदर्शक बने रहे।
इस घटना ने समाज में व्याप्त जातिवाद पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने केवल अपने पिता को खोने का ही नहीं, बल्कि अपमान सहने का भी दर्द व्यक्त किया। उन्होंने जिला प्रशासन से न्याय की मांग करते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की अपील की है।
सामाजिक नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इस प्रकार की प्रथाएं सामाजिक सद्भाव और मानवीय गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। यह मामला समाज में जाति आधारित भेदभाव के विरुद्ध जागरूकता और कानून के सख्त पालन की आवश्यकता को उजागर करता है।
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