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हरित अर्थव्यवस्था की ओर ओडिशा का बड़ा कदम
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जाइका समर्थित राष्ट्रीय वन कार्यशाला में ‘वुड ट्रांसफॉर्मेशन’ और उद्योग सहयोग पर जोर
भुवनेश्वर। भारत में हरित और लचीली लकड़ी आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए जाइका समर्थित वन परियोजनाओं की 14वीं राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन ‘वुड ट्रांसफॉर्मेशन’ और उद्योग से जुड़ाव को भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था का आधार बताया गया।
इस कार्यशाला का आयोजन ओडिशा सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत ओडिशा फॉरेस्ट्री सेक्टर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (द्वितीय चरण) द्वारा जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी के सहयोग से किया गया। कार्यशाला में टिकाऊ लकड़ी आपूर्ति प्रणाली को मजबूत करने, वन प्रमाणीकरण को बढ़ावा देने तथा घरेलू एवं वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री विस्तार जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
समन्वित प्रयासों से हरित वन क्षेत्र को गति
समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए ओडिशा सरकार के प्रधान सचिव (वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन) भास्कर ज्योति शर्मा ने कहा कि राज्यों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच समन्वित प्रयास भारत को जलवायु-सहिष्णु वन क्षेत्र की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने वन सुरक्षा समिति (वीएसएस) और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों से संवाद करते हुए आजीविका संवर्धन और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के प्रति ओडिशा की प्रतिबद्धता दोहराई।
जलवायु अनुकूलन और डिजिटल परिवर्तन भविष्य की धुरी
कार्यशाला के निष्कर्षों को प्रस्तुत करते हुए सिद्धार्थ परमेश्वरन ने जलवायु अनुकूलन, वुड ट्रांसफॉर्मेशन और डिजिटल परिवर्तन को भविष्य के सहयोग के तीन प्रमुख स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि जापानी विशेषज्ञों और निजी क्षेत्र के साथ नवाचार एवं सह-निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि आधिकारिक विकास सहायता के बदलते परिदृश्य में दोनों देशों को पारस्परिक लाभ मिल सके।
तकनीकी नवाचार और आधुनिक प्रसंस्करण मॉडल
तकनीकी सत्रों में कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा से नवाचारपूर्ण और विस्तार योग्य मॉडलों को प्रस्तुत किया गया। वृक्षारोपण में उन्नत आनुवंशिकी के उपयोग और आधुनिक लकड़ी प्रसंस्करण तकनीकों, जैसे क्रॉस लैमिनेटेड टिम्बर, को अपनाने पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने यह भी रेखांकित किया कि वन क्षेत्र में विकसित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को अलग-थलग मंचों के बजाय एकीकृत निर्णय-सहायता प्रणाली के रूप में कार्य करना चाहिए, ताकि दीर्घकालिक नीति निर्माण और योजना प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जा सके।
वन विकास में साझेदारी और समावेशन का संदेश
समापन सत्र में अतिथि के रूप में ओडिशा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के मुरुगेसान ने संबोधित किया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (परियोजनाएं) एवं परियोजना निदेशक ओएफएसडीपी जी राजेश के स्वागत भाषण से हुई तथा संयुक्त परियोजना निदेशक स्वयं मल्लिक के धन्यवाद ज्ञापन के साथ समापन हुआ।
इस राष्ट्रीय कार्यशाला ने स्पष्ट संदेश दिया कि टिकाऊ वन प्रबंधन, उद्योग सहयोग और तकनीकी नवाचार के माध्यम से ही भारत एक मजबूत और हरित लकड़ी आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण कर सकता है। ओडिशा की पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर रही है, जो जलवायु संतुलन और ग्रामीण आजीविका दोनों को सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है।
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