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सिमिलिगुड़ा में 193.9 मिमी बारिश
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मालकानगिरि में बाढ़ से जनजीवन ठप
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रायगड़ा से 80 किमी दूर केंद्रित था डिप डिप्रेशन
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तीन जिलों में रेड अलर्ट; 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
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मालकानगिरि में पुल डूबे, एनएच-326 पर आवागमन बंद
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कालीमेला और पोडिया प्रखंडों का संपर्क कटा
भुवनेश्वर। ओडिशा में डिप डिप्रेशन के प्रभाव से दक्षिणी और तटीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का सिलसिला जारी है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के सात स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश दर्ज की गई, जबकि 58 स्थानों पर भारी वर्षा हुई। कोरापुट जिले के सिमिलिगुड़ा में सर्वाधिक 193.9 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इस बीच रायगड़ा से लगभग 80 किलोमीटर दूर केंद्रित डिप डिप्रेशन के कारण तेज हवाओं और भारी बारिश का खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने कोरापुट, नवरंगपुर और कलाहांडी जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।
मालकानगिरि जिले में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से कई पुल डूब गए हैं और राष्ट्रीय राजमार्ग-326 पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। कालीमेला और पोडिया प्रखंडों का जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क कट गया है।
कमजोर हो रहा डिप डिप्रेशन
भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती के अनुसार, डिप डिप्रेशन वर्तमान में रायगड़ा से लगभग 80 किलोमीटर दूर केंद्रित है। इसके धीरे-धीरे कमजोर होकर सामान्य डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। हालांकि, इसके कमजोर होने के बावजूद दिनभर राज्य के कई हिस्सों में प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां बनी रह सकती हैं।
दक्षिणी ओडिशा में भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण निचले इलाकों में जलभराव तथा स्थानीय बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
समुद्र में खराब मौसम और तेज हवाओं को देखते हुए मछुआरों को शुक्रवार तक समुद्र में नहीं जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
सिमिलिगुड़ा में सर्वाधिक बारिश
मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार सुबह 8.30 बजे तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में व्यापक बारिश दर्ज की गई। कोरापुट जिले का सिमिलिगुड़ा 193.9 मिलीमीटर वर्षा के साथ राज्य में सबसे अधिक बारिश वाला स्थान रहा।
मालकानगिरि जिले के चित्रकोंडा में 168.8 मिलीमीटर, गजपति जिले के महेंद्रगढ़ में 153.4 मिलीमीटर और खुर्दा जिले के टांगी में 142.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
कंधमाल जिले के जी उदयगिरि में 125.4 मिलीमीटर, गजपति जिले के पारलाखेमुंडी में 121.4 मिलीमीटर तथा गोसानी में 120.0 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।
इसके अलावा कटक जिले के बांकी में 112.0 मिलीमीटर, केंदुझर जिले के घासीपुरा में 110.2 मिलीमीटर, बालेश्वर जिले के जलेश्वर में 107.2 मिलीमीटर, मालकानगिरि शहर में 101.0 मिलीमीटर और जाजपुर जिले के बारी में 100.0 मिलीमीटर बारिश हुई।
गंजाम, मयूरभंज, जाजपुर, नयागढ़, कंधमाल, कोरापुट, खुर्दा, कटक और नवरंगपुर जिलों के अनेक स्थानों पर 64 से 99 मिलीमीटर के बीच भारी बारिश दर्ज की गई।
मालकानगिरि में बाढ़ से सड़क संपर्क ठप
लगातार मूसलाधार बारिश के कारण मालकानगिरि जिले में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। बाढ़ का पानी कई महत्वपूर्ण पुलों के ऊपर से बहने के कारण जिला मुख्यालय से कालीमेला और पोडिया प्रखंडों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
पोटेरू पुल के ऊपर लगभग दो फीट पानी बह रहा है, जबकि कंगुरकोंडा पुल छह से सात फीट बाढ़ के पानी में डूब गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-326 पर पोटेरू नर्सरी के सामने लगभग दो फीट पानी जमा हो गया है। एमवी-96 पुल तीन फीट, जबकि एमवी-90 गुबिली पुल पर तीन से चार फीट पानी बह रहा है।
कालीमेला-पोडिया संपर्क मार्ग पर स्थित कन्या आश्रम पुल भी दो से तीन फीट पानी में डूब गया है। तेज बहाव के कारण इन पुलों से वाहनों का गुजरना बेहद खतरनाक हो गया है।
एनएच-326 पर ट्रकों की लंबी कतार, सीमावर्ती गांवों का संपर्क कटा
राष्ट्रीय राजमार्ग-326 पर बाढ़ का पानी भर जाने से विजयवाड़ा और रांची को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। पुलों के दोनों ओर मालवाहक ट्रकों, ट्रेलरों और यात्री वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। वाहन चालक रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
बाढ़ के कारण कालीमेला और पोडिया प्रखंडों के अलावा एमवी-90, एमवी-72, एमवी-79, एमपीवी-81, एमवी-88, महाराजपल्ली, पुसुगुड़ा और सीमावर्ती क्षेत्र मोटू सहित कई गांवों और बस्तियों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
सड़क संपर्क टूटने से स्थानीय लोगों के आवागमन के साथ आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है।
धान और तिल की फसलें जलमग्न, पुलिस की तैनाती
मालकानगिरि जिले में बाढ़ का असर खेती पर भी पड़ा है। निचले इलाकों में धान और तिल की फसलें पानी में डूब गई हैं। बड़े कृषि क्षेत्रों में जलभराव के कारण किसानों को भारी नुकसान की आशंका है। हालांकि, फसल क्षति का वास्तविक आकलन पानी उतरने के बाद ही हो सकेगा।
बाढ़ के पानी में पुलों के डूबने और तेज बहाव से दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए पुलिसकर्मियों को प्रभावित पुलों के दोनों ओर तैनात किया गया है। खतरनाक स्थानों पर लाल फीते से बैरिकेडिंग की गई है और लोगों को पानी के तेज बहाव के बीच पुल पार करने से रोका जा रहा है।
प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने, जलमग्न सड़कों और पुलों से गुजरने का प्रयास नहीं करने तथा नदी-नालों के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने की सलाह दी गई है।
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