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चक्रवाती तूफान नहीं, खोरधा में तीन दिन स्कूल बंद, दक्षिण ओडिशा में रेड अलर्ट

  • बंगाल की खाड़ी का सिस्टम डीप डिप्रेशन में तब्दील

  • 23-24 सितंबर की रात विशाखापट्टनम-गोपालपुर के बीच तट पार करने का अनुमान

  • गंजाम, गजपति और कोरापुट में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी

भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में बना मौसम सिस्टम डीप डिप्रेशन में तब्दील हो गया है और इसके 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की सुबह के बीच विशाखापट्टनम और गोपालपुर के बीच तट पार करने का अनुमान है। इसके प्रभाव से ओडिशा के दक्षिणी और तटीय जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए खोरधा जिले के सभी स्कूल 22 से 24 सितंबर तक तीन दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। स्कूल बंद रखने का आदेश सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, ओडिशा आदर्श विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय और निजी स्कूलों पर लागू होगा। शिशु वाटिका से कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थी इसके दायरे में आएंगे। हालांकि 22 सितंबर को निर्धारित एनआरएसटी परीक्षा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 13 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होगी।

मौसम विभाग के अनुसार 21 सितंबर की शाम 5:30 बजे यह सिस्टम पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 17.7 डिग्री उत्तर और 87.8 डिग्री पूर्व के आसपास स्थित था। यह पुरी से करीब 310 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और गोपालपुर से करीब 310 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में था। उस समय अधिकतम लगातार हवा की गति 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे थी, जबकि झोंकों के साथ यह 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही थी। सिस्टम के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और अगले 24 घंटे में और मजबूत होकर डीप डिप्रेशन बनने का अनुमान जताया गया था।

खोरधा में 22 से 24 सितंबर तक स्कूल बंद

खोरधा जिला प्रशासन ने खराब मौसम और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए तीन दिनों तक सभी स्कूल बंद रखने का फैसला किया है। जिला परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा, खोरधा की ओर से 21 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार 22, 23 और 24 सितंबर को विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में पठन-पाठन बंद रहेगा।

यह आदेश सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के साथ-साथ ओडिशा आदर्श विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय और निजी विद्यालयों पर भी लागू होगा। शिशु वाटिका से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थी इसके दायरे में होंगे।

हालांकि विद्यार्थियों को स्कूल नहीं आना होगा, लेकिन शिक्षक और अन्य स्कूल कर्मचारी अपने-अपने विद्यालयों में उपस्थित रहेंगे। आदेश में 22 से 24 सितंबर के बीच आकस्मिक अवकाश की अनुमति नहीं देने का भी निर्देश दिया गया है।

विद्यालयों को मौसम की स्थिति को देखते हुए भवनों और आवश्यक सुविधाओं को तैयार रखने को कहा गया है। प्रधानाध्यापकों को स्कूलों को आवश्यकता पड़ने पर 24 घंटे सुलभ रखने के लिए रोस्टर ड्यूटी तैयार करने और जिला प्रशासन के साथ आवश्यक सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।

22 सितंबर की एनआरएसटी परीक्षा नहीं होगी प्रभावित

स्कूलों में सामान्य पठन-पाठन बंद रहने के बावजूद 22 सितंबर को होने वाली एनआरएसटी परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएगी। परीक्षा बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन, ओडिशा के कार्यक्रम के अनुसार जिले के 13 निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर होगी।

इस दौरान परीक्षा केंद्रों और स्कूल भवनों में आवश्यक सुरक्षा तथा प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

गंजाम, गजपति और कोरापुट में रेड अलर्ट

डीप डिप्रेशन के प्रभाव से 23 सितंबर को दक्षिण ओडिशा के कई जिलों में मौसम बेहद खराब रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने गंजाम, गजपति और कोरापुट के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने की संभावना है।

23 से 24 सितंबर के दौरान जगतसिंहपुर, कटक, कालाहांडी, कंधमाल, नबरंगपुर, रायगड़ा, मालकानगिरी, पुरी, खोरधा और नयागढ़ समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के लिए ऑरेंज चेतावनी जारी की गई है।

24 सितंबर को पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी ओडिशा में बढ़ेगा असर

डीप डिप्रेशन के तट पार करने के बाद इसके ओडिशा के अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ने का अनुमान है। इसके चलते 24 से 25 सितंबर के दौरान कालाहांडी, नबरंगपुर, कोरापुट और मालकानगिरी में अत्यंत भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है।

नुआपड़ा, बलांगीर, कालाहांडी, रायगड़ा, गजपति और गंजाम में भी भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। यानी सिस्टम के तट पार करने के बाद भी इसका प्रभाव तुरंत खत्म नहीं होगा, बल्कि बारिश का क्षेत्र धीरे-धीरे पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम ओडिशा की ओर बढ़ सकता है।

75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है हवा

डीप डिप्रेशन के तट के करीब पहुंचने के दौरान हवा की गति 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तथा झोंकों के साथ 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का सबसे अधिक प्रभाव रहने की संभावना है।

तेज हवाओं के कारण पेड़ों और उनकी शाखाओं के टूटने, कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंचने तथा बिजली और संचार व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। केले, पपीते और अन्य बागवानी फसलों को भी नुकसान हो सकता है।

समुद्र में ऊंची लहरें, सभी बंदरगाहों पर एलसी-3

डीप डिप्रेशन के प्रभाव से बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति खराब से बहुत खराब रहने का अनुमान है। 22 से 24 सितंबर के दौरान पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में तेज हवाएं चलने और समुद्र में ऊंची लहरें उठने की संभावना है।

ओडिशा के सभी बंदरगाहों पर लोकल कॉशनरी सिग्नल नंबर-3 (एलसी-3) लगाया गया है। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। समुद्र में मौजूद मछुआरों को भी तत्काल तट पर लौटने का निर्देश दिया गया है।

जलभराव, अंडरपास बंद होने और भूस्खलन का खतरा

मौसम विभाग ने भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और शहरी क्षेत्रों में अंडरपास बंद होने की आशंका जताई है। पहाड़ी इलाकों में स्थानीय स्तर पर भूस्खलन और मिट्टी खिसकने की स्थिति बन सकती है।

तेज हवाओं के कारण खुले में रखी वस्तुओं के उड़ने, पेड़ों के गिरने और बिजली के तार टूटने का खतरा भी रहेगा। प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले रास्तों से गुजरने और पेड़ों या कमजोर संरचनाओं के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है।

बारिश का मुख्य दौर अभी बाकी

21 सितंबर की शाम तक पारादीप में 23.6 मिलीमीटर, चांदबली में 18 मिलीमीटर, कटक में 13.6 मिलीमीटर, केंद्रापड़ा में 12 मिलीमीटर, पुरी में 11.2 मिलीमीटर और छत्रपुर में 10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अगले 48 घंटों में बारिश की तीव्रता और बढ़ सकती है।

फिलहाल यह सिस्टम चक्रवाती तूफान नहीं है, बल्कि डीप डिप्रेशन के रूप में तट की ओर बढ़ रहा है। इसके बावजूद दक्षिण ओडिशा में भारी से अत्यंत भारी बारिश, तेज हवाओं, जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रखा गया है।

मौसम विभाग के अनुसार 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की सुबह के बीच तट पार करने की संभावित अवधि महत्वपूर्ण रहेगी। सिस्टम के मार्ग और तीव्रता पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा अगले बुलेटिनों में इसके संभावित प्रभाव को लेकर और अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

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